भोपाल से खाड़ी देशों तक फैला गोमांस तस्करी का ‘अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क’, अत्याधुनिक पैकेजिंग में भेजा जा रहा था प्रतिबंधित मांस

भोपाल। शहर के जिंसी स्थित स्लाटर हाउस से पकड़े गए 26 टन गोमांस के मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। शुरुआती जांच में जो मामला स्थानीय अवैध कटान का लग रहा था, वह अब खाड़ी देशों तक फैले संगठित निर्यात गिरोह की ओर इशारा कर रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से प्रतिबंधित गोमांस को विदेशों तक पहुंचा रहा था।
जांच में सामने आया है कि असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा इस पूरे रैकेट का मुख्य कर्ताधर्ता है। वह नगर निगम के कथित संरक्षण में गोवंश का कटान कराता था और फिर अत्याधुनिक तकनीक से मांस की पैकेजिंग कर उसे निर्यात के लिए तैयार किया जाता था। मांस को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भैंस का मांस बताकर कस्टम और अन्य एजेंसियों की जांच से बचाया जाता था। आरोप है कि सरकारी पशु चिकित्सक के प्रमाण-पत्रों का दुरुपयोग कर गोमांस को कानूनी रूप देने की कोशिश की जाती थी।
सूत्रों के मुताबिक, जब्त मांस की पैकेजिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसी थी। हर पैकेट पर क्यूआर कोड, टैग और वैक्यूम सीलिंग की व्यवस्था थी, ताकि मांस लंबे समय तक खराब न हो और बिना गंध के सुरक्षित पहुंच सके। इस मांस को मुंबई और चेन्नई के बंदरगाहों तक भेजा जाता था, जहां से इसे दुबई, बैंकॉक और अन्य खाड़ी देशों में सप्लाई किया जाता था। कई बार रेलवे पार्सल सेवा का भी इस्तेमाल किया गया।
हिंदू संगठनों ने मामले में बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि असलम के विदेशों में मजबूत संपर्क हैं और पूरा कारोबार कॉरपोरेट मॉडल पर चलाया जा रहा था। वहीं, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। आरोपियों को जेल भेजा गया है और दोबारा रिमांड पर लेकर नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।





