रिलायंस ने क्विक कॉमर्स में मुनाफे की रेस में सबको पीछे छोड़ दिया

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी कारोबार में मुनाफा कमाने का दावा किया है, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कंपनी ने 10 मिनट डिलीवरी वाले बिजनेस में और अपने पुराने स्टोर नेटवर्क के जरिए हर ऑर्डर पर लाभ कमाना शुरू कर दिया है, जबकि स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियां अभी भी घाटे में हैं।
रिलायंस ने अक्टूबर 2024 में क्विक कॉमर्स बिजनेस शुरू किया था और अब तीन साल में उनका एफएमसीजी कारोबार भी ईबीटीडीए पॉजिटिव हो गया है। कंपनी की सफलता के पीछे उनके मजबूत सप्लाई चेन और बड़े थोक में खरीदारी की वजह से मिलने वाले बेहतर रेट हैं। खासतौर पर फूड और बेवरेज कैटेगरी में सबसे ज्यादा मार्जिन है और क्विक कॉमर्स पर हर तीन में से एक ऑर्डर इसी कैटेगरी का आता है।
सप्लाई चेन मैनेजमेंट के जरिए बर्बादी कम करने की रणनीति ने कंपनी को लागत बचाने और मुनाफा बढ़ाने में मदद की है। अब रिलायंस सिर्फ राशन ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन उत्पाद भी डिलीवर कर रही है। कंपनी के पास करीब 3,000 आउटलेट हैं, जिनमें से 800 डार्क स्टोर्स हैं, और वे अपने पहले से मौजूद स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल कर लागत कम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 की तिमाही में कंपनी को प्रतिदिन 16 लाख ऑर्डर मिल रहे थे और ऑर्डर में तिमाही दर तिमाही 53% की बढ़ोतरी हुई।
इस बीच, ब्लिंकिट और स्विगी अभी भी घाटे में हैं। ब्लिंकिट कुछ शहरों में लाभ कमा रही है, लेकिन नए शहरों में विस्तार की वजह से खर्च बढ़ा है। स्विगी का घाटा कम हुआ है, लेकिन वे अभी पूरी तरह मुनाफे में नहीं आए हैं।
रिलायंस का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स खिलाड़ी बनना है और उनकी रणनीति ने इस प्रतिस्पर्धा में कंपनी को मजबूत स्थिति दिलाई है।





