केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि लैप्स न हो, मध्य प्रदेश ने केंद्र से रखी बड़ी मांग

मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही वित्तीय दिक्कतों को लेकर केंद्र सरकार से अहम मांग की है। राज्य का कहना है कि बजट में पर्याप्त प्रावधान होने के बावजूद केंद्र से राशि समय पर नहीं मिलने के कारण योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है और कई बार बजट राशि लैप्स हो जाती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में प्रदेश के बजट में 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, लेकिन अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत केवल करीब 17 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब कम समय बचा है, ऐसे में यदि राशि देर से जारी होती है तो उसका उपयोग संभव नहीं हो पाता।
राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि योजनाओं की स्वीकृति को अगले वित्तीय वर्ष तक मान्य रखा जाए, ताकि देर से मिलने वाली राशि का उपयोग किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि फरवरी या मार्च के अंतिम दिनों में मिलने वाला फंड अक्सर खर्च नहीं हो पाता, जिससे योजनाओं की गति प्रभावित होती है।
केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई एसएनए-स्पर्श प्रणाली से पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन वित्तीय प्रबंधन के स्तर पर कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इस व्यवस्था के तहत योजनावार खाते खोलकर राशि जारी की जाती है, जिससे धन के दुरुपयोग पर रोक लगती है, लेकिन समय पर फंड ट्रांसफर न होने से राज्य सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जल जीवन मिशन जैसी अहम योजनाओं पर भी इसका असर पड़ा है। केंद्रांश की प्रतीक्षा में राज्य सरकार ने अपने स्तर पर अग्रिम राशि जारी की, लेकिन पिछले और चालू वित्तीय वर्ष की हजारों करोड़ रुपये की राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसी तरह जनजातीय कार्य विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं में भी केंद्र से मिलने वाली राशि लंबे समय से लंबित है।
अन्य केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में भी स्थिति लगभग समान बनी हुई है। प्रदेश ने दर्जनों योजनाओं को एसएनए-स्पर्श के तहत जोड़ा है और कई योजनाओं में डीबीटी के माध्यम से भुगतान शुरू हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र से धनराशि मिलने में देरी हो रही है।
वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर न भेजे जाने के कारण भी केंद्रांश अटकता है। इसको लेकर मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर केंद्र को भेजे जाएं, ताकि राशि जारी होने में देरी न हो और योजनाओं के लक्ष्य समय पर पूरे किए जा सकें।





