विजय की फिल्म पर सेंसर अड़चन से सियासी घमासान, स्टालिन ने केंद्र पर लगाया सीबीएफसी के दुरुपयोग का आरोप

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ की रिलीज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तय तारीख पर फिल्म के रिलीज न हो पाने से सियासी बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और आयकर विभाग की तरह अब सेंसर बोर्ड को भी विपक्ष को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की। हालांकि अपने बयान में उन्होंने फिल्म का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन इशारा स्पष्ट रूप से ‘जना नायकन’ विवाद की ओर था।
इस बीच मद्रास हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सीबीएफसी को फिल्म को तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था। डिविजन बेंच के इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज फिलहाल अधर में लटक गई है।
इससे पहले सिंगल बेंच ने फिल्म निर्माता की याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि जब बोर्ड पहले ही सर्टिफिकेट देने का फैसला कर चुका था, तो चेयरपर्सन को मामले को रिव्यू कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था। इस आदेश के खिलाफ फिल्म बोर्ड ने तुरंत अपील दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए डिविजन बेंच ने रोक लगा दी।
फिल्म बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि सेना से जुड़े संदर्भों और धार्मिक भावनाओं को लेकर कुछ आपत्तियां थीं, इसलिए मामले को रिव्यू पैनल के पास भेजा गया। वहीं निर्माता पक्ष का कहना है कि तय समय पर निर्णय न होने से फिल्म की रिलीज और व्यावसायिक हितों को नुकसान हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि ‘जना नायकन’ विजय की आखिरी फिल्म बताई जा रही है, जिसकी रिलीज 9 जनवरी को प्रस्तावित थी। एच विनोद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विजय के साथ प्रकाश राज, पूजा हेगड़े और मामिता बैजू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। अब कोर्ट के ताजा आदेश के बाद दर्शकों को फिल्म के रिलीज होने का और इंतजार करना पड़ेगा।





