2026 में ज्येष्ठ अधिकमास का दुर्लभ संयोग, उज्जैन में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास का विशेष संयोग बन रहा है, जो 32 महीने 16 दिन बाद आया है। पंचांग की गणना के अनुसार पुरुषोत्तम मास के रूप में यह अधिकमास 17 मई से आरंभ होकर 15 जून तक रहेगा। इस अवधि में उज्जैन आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आएगा, जहां देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस माह में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। उज्जैन में इस अवधि के दौरान चौरासी महादेव, नौ नारायण और सप्त सागर के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इन स्थलों पर पूजा-पाठ, दान और तीर्थाटन के लिए पहुंचते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भारतीय ज्योतिष में तिथि संतुलन के लिए लगभग हर 32 महीने में अधिकमास का संयोग बनता है। इससे पहले ज्येष्ठ अधिकमास का संयोग 1988, 1999, 2007 और 2018 में बन चुका है, जबकि वर्ष 2023 में श्रावण अधिकमास आया था। इस बार 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास रहेगा।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिकमास को मल मास भी कहा जाता है। इस दौरान विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। श्रद्धालु इस एक माह में तीर्थाटन, भगवत पाठ, दान, धर्म और देव दर्शन में समय बिताते हैं। कल्पवास का भी इस अवधि में विशेष महत्व माना गया है।

ज्येष्ठ अधिकमास का समापन 15 जून को सोमवती अमावस्या के दिन होगा। इस अवसर पर शिप्रा नदी और सोमकुंड में पर्व स्नान का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

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