मध्य प्रदेश में शीतलहर का असर तेज, हार्ट और सांस के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा

मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। तापमान में लगातार गिरावट के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि शीतलहर के दौरान लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। दिसंबर और जनवरी में जब न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है, तब शरीर पर इसका सीधा असर पड़ता है।
चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक ठंडी हवा के संपर्क में रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है। इससे हाइपोथर्मिया, शीतदंश, चिलब्लेन और ट्रेंच फुट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे और हृदय व सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों को सबसे अधिक खतरा रहता है। इसके अलावा खुले में काम करने वाले श्रमिक और बेघर लोग भी जोखिम में हैं।
अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, खांसी और वायरल लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सामान्य दिनों की तुलना में मौसम से जुड़ी शिकायतों में इजाफा देखा गया है। कुल मरीजों में करीब 30 से 35 प्रतिशत लोग शीतलहर से संबंधित लक्षणों के साथ उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग ने शीतलहर से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। वयस्कों में अत्यधिक कंपकंपी, थकान, भ्रम, बोलने में लड़खड़ाहट और सुस्ती दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने को कहा गया है। बच्चों में त्वचा का अत्यधिक ठंडा या लाल हो जाना, ऊर्जा में कमी और असामान्य चुप्पी को गंभीर संकेत माना गया है।
शीतलहर से बचाव के लिए लोगों को कई परतों में गर्म कपड़े पहनने, सिर, गर्दन, हाथ और पैरों को ढंककर रखने की सलाह दी गई है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने, विटामिन-सी युक्त फल और सब्जियों का सेवन करने तथा नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ पीने पर जोर दिया गया है। ठंडी हवा से बचने के लिए अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज करने को कहा गया है।
यदि कोई व्यक्ति ठंड से प्रभावित दिखाई दे, तो उसे तुरंत गर्म स्थान पर ले जाकर सूखे कपड़े पहनाने और कंबल से ढंकने की सलाह दी गई है। शीतलहर को देखते हुए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। दवाओं का पर्याप्त भंडारण, अतिरिक्त स्टाफ और एंबुलेंस सेवाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।





