बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासियों के उत्पीड़न का आरोप, 1143 शिकायतें दर्ज

पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड ने दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासियों के खिलाफ उत्पीड़न की 1143 शिकायतें सामने आई हैं। बोर्ड के चेयरमैन और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने इन घटनाओं को देश के संघीय ढांचे पर हमला करार दिया है।
समीरुल इस्लाम के अनुसार, जहां पश्चिम बंगाल में अन्य राज्यों से आए लगभग 1.3 करोड़ प्रवासी सुरक्षित हैं, वहीं देश के विभिन्न हिस्सों में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करीब 30 लाख बंगाली प्रवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि शिकायतों में धमकी, मारपीट, मौखिक दुर्व्यवहार और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
इस्लाम ने बताया कि कई मामलों में सिर्फ बंगाली भाषा बोलने के संदेह में लोगों को बांग्लादेशी मान लिया गया। ऐसे ही मामलों में करीब 95 लोगों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन जांच के बाद सभी भारतीय नागरिक पाए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा समेत कुछ भाजपा शासित राज्यों में दो प्रवासियों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि एक अन्य का कान काट दिया गया। उनका कहना है कि प्रवासन कोई अपराध नहीं है और लोगों को देश में कहीं भी काम करने का संवैधानिक अधिकार है।
समीरुल इस्लाम ने सवाल उठाया कि अगर किसी के बांग्लादेशी होने का संदेह है, तो दस्तावेजों की जांच के बजाय केवल शक के आधार पर हिंसा क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई घुसपैठिया साबित होता है, तो कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन भीड़ हिंसा को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
बोर्ड के मुताबिक, सभी 1143 शिकायतों पर कार्रवाई की गई है। कई मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता दी गई और जरूरत पड़ने पर उन्हें पश्चिम बंगाल वापस लाया गया। इनमें ओडिशा से 546, हरियाणा से 236, राजस्थान से 110 और महाराष्ट्र से 62 प्रवासी शामिल हैं।
तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह मार्च से लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और भाषा या पहचान के आधार पर होने वाले उत्पीड़न को तुरंत रोका जाए।





