निजी स्कूलों की फीस पर सतर्क रहें अभिभावक, एडमिशन से पहले डीपीआइ पोर्टल पर करें जांच

नवीन शिक्षण सत्र के लिए निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। ऐसे में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे स्कूल प्रबंधन द्वारा बताए जा रहे फीस स्ट्रक्चर पर बिना जांच किए भरोसा न करें। बच्चे का एडमिशन कराने से पहले यह जरूर जांच लें कि स्कूल द्वारा मांगी जा रही फीस वही है या नहीं, जो लोक शिक्षण संचालनालय के डीपीआइ पोर्टल पर दर्ज की गई है।

शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने अपनी फीस का पूरा विवरण डीपीआइ पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। नियमों के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल पोर्टल पर घोषित फीस से एक रुपये भी अधिक नहीं वसूल सकता। ट्यूशन फीस, परिवहन शुल्क और अन्य सभी मदों की जानकारी पोर्टल पर स्पष्ट रूप से दी गई है।

अक्सर यह देखने में आता है कि कुछ स्कूल अतिरिक्त या छिपे हुए शुल्क के नाम पर अभिभावकों से अधिक राशि वसूलते हैं। कई मामलों में पोर्टल पर कम फीस दर्शाई जाती है, जबकि एडमिशन के समय अधिक रकम ली जाती है। यदि पोर्टल पर दर्ज फीस और स्कूल द्वारा जारी रसीद में अंतर पाया जाता है, तो यह फीस नियामक अधिनियम का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

अभिभावक डीपीआइ के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्कूल या क्षेत्र का नाम सर्च कर सकते हैं। यहां आगामी सत्र के लिए निर्धारित फीस का पूरा ब्योरा उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि एडमिशन फॉर्म भरने से पहले फीस विवरण का स्क्रीनशॉट या प्रिंट निकालकर सुरक्षित रख लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहे।

यदि किसी स्कूल द्वारा पोर्टल पर दर्शाई गई फीस से अधिक राशि वसूली जाती है, तो अभिभावक इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी या जिला प्रशासन से कर सकते हैं। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, यहां तक कि मान्यता रद होने की भी संभावना रहती है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि फीस को लेकर नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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