हिंदू एकजुट होंगे तो ही सनातन का उत्थान होगा: मोहन भागवत

दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में आयोजित ‘विश्व संघ शिविर’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए हिंदुओं से एकजुट होकर सनातन धर्म को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देना है। मोहन भागवत ने ‘विश्वगुरु’ की अवधारणा पर चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि भारत का विश्वगुरु बनना व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि विश्व की आवश्यकता है। इसके लिए निरंतर और कठोर परिश्रम की जरूरत है, जिसमें संघ सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयासों के माध्यम से योगदान दे रहा है।

भागवत ने बीसवीं शताब्दी के आध्यात्मिक नेता योगी अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान का विचार एक शताब्दी पहले ही व्यक्त किया गया था।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी हिंदू मिलकर सनातन धर्म का उत्थान करें। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ और उससे जुड़े संगठन हिंदू समाज को संगठित करना और मूल्य आधारित, अनुशासित जीवन का उदाहरण विश्व के सामने प्रस्तुत करना सुनिश्चित कर रहे हैं।

भारत की वैश्विक भूमिका पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि विश्वगुरु बनने के लिए व्यक्तित्व निर्माण और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है। उन्होंने संघ से जुड़े स्वयंसेवकों के कार्यों की सराहना की और कहा कि समाज में उनका विश्वास बढ़ रहा है।

तकनीक, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि मानवता को तकनीक का स्वामी बने रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उपयोग केवल दैवीय प्रवृत्तियों और विश्व कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि विनाशकारी कार्यों के लिए। भागवत ने स्पष्ट किया कि अपने आचरण से उदाहरण पेश करने पर ही दुनिया भारत के विचार और जीवन मूल्यों को स्वीकार करेगी।

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