शराब घोटाले में बड़ा दावा, EOW ने चैतन्य बघेल पर 250 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने रायपुर की विशेष अदालत में करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को इस घोटाले से लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध रकम मिली है। यह इस मामले में पेश की गई आठवीं चार्जशीट है।
EOW के अनुसार, शराब सिंडिकेट के जरिए की गई अवैध उगाही का बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर चैतन्य बघेल से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आबकारी विभाग में वसूली तंत्र को खड़ा करने और उसे संरक्षण देने में उनकी अहम भूमिका रही। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने प्रशासनिक अधिकारियों और कारोबारियों के बीच समन्वय बनाकर सिंडिकेट के हित में काम किया।
जांच में यह भी बताया गया है कि चैतन्य बघेल ने सिंडिकेट से जुड़े अधिकारियों और कारोबारियों को दिशा-निर्देश दिए और अवैध रूप से जुटाई गई रकम को अपने भरोसेमंद लोगों के जरिए ऊपरी स्तर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। इस रकम को अलग-अलग फर्मों और बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पारिवारिक व्यवसायों में निवेश किया गया, जिसे बाद में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया गया।
EOW का कहना है कि अब तक की जांच में शराब घोटाले की कुल रकम लगभग 3000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जो आगे की जांच में 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है और अवैध कमाई नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के बीच बांटी गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच कर रही है। ED के अनुसार, चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष स्तर पर थे और नेटवर्क के संचालन व फैसलों पर उनका नियंत्रण था। एजेंसी का दावा है कि अवैध आय को वैध दिखाने के लिए इसे रियल एस्टेट कारोबार में लगाया गया।
इस मामले में पहले भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बड़ी मात्रा में संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि शराब घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच जारी है और आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।





