कैश-फॉर-क्वेरी मामले में महुआ मोइत्रा को राहत, हाई कोर्ट ने लोकपाल की मंजूरी रद्द की

कैश-फॉर-क्वेरी विवाद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई चार्जशीट दाखिल करने के लिए लोकपाल द्वारा दी गई मंजूरी को रद्द कर दिया है। अदालत ने लोकपाल को निर्देश दिया है कि वह इस मामले पर एक महीने के भीतर नए सिरे से विचार कर फैसला ले।

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने महुआ मोइत्रा की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि लोकपाल की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में खामियां नजर आती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकपाल को लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के तहत फिर से पूरे मामले की समीक्षा करनी होगी।

यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया था कि महुआ मोइत्रा ने एक कारोबारी से नकद और उपहार के बदले संसद में सवाल पूछे। इन्हीं आरोपों के आधार पर सीबीआई ने मार्च 2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी और बाद में लोकपाल से चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगी गई थी।

महुआ मोइत्रा की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि लोकपाल ने मंजूरी देते समय कानून में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उनके वकील ने तर्क दिया कि अधिनियम की धारा के अनुसार संबंधित पक्षों की राय लेना आवश्यक था, जो नहीं किया गया। वहीं सीबीआई ने इस याचिका का विरोध करते हुए लोकपाल की प्रक्रिया को सही ठहराया था।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई चार्जशीट पर लगी मंजूरी प्रभावी नहीं रहेगी। अब लोकपाल को अदालत के निर्देश के अनुसार एक महीने के भीतर पूरे मामले पर पुनर्विचार कर नया निर्णय लेना होगा। इस आदेश को महुआ मोइत्रा के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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