तंबाकू बना रहा पुरुषों को निःसंतान, एम्स भोपाल के शोध में चौंकाने वाला खुलासा

बीड़ी, सिगरेट और गुटखे का सेवन अब सिर्फ कैंसर या फेफड़ों की बीमारी तक सीमित खतरा नहीं रहा। एम्स भोपाल में हुए एक शोध में सामने आया है कि तंबाकू पुरुषों की प्रजनन क्षमता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहा है और धीरे-धीरे उन्हें निःसंतान बना सकता है।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र कुमार विदुआ के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में तंबाकू के प्रभाव को वैज्ञानिक आधार पर परखा गया। आमतौर पर बांझपन की जांच जीवित लोगों पर होती है, लेकिन इस शोध में 57 मृत व्यक्तियों के पोस्टमार्टम के दौरान उनके प्रजनन अंगों और शुक्राणुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इस प्रक्रिया के लिए परिजनों की सहमति और आईसीएमआर की अनुमति ली गई थी।
शोध में पाया गया कि तंबाकू का सेवन करने वाले पुरुषों के वीर्य की गुणवत्ता बेहद खराब थी। तंबाकू में मौजूद जहरीले तत्व प्रजनन अंगों के ऊतकों में जमा होकर उनकी संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके कारण शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है और जो शुक्राणु बचते हैं, वे इतने कमजोर हो जाते हैं कि संतान उत्पत्ति में सक्षम नहीं रहते। कई मामलों में नपुंसकता का खतरा भी बढ़ता पाया गया।
पोस्टमार्टम के दौरान प्रजनन अंगों में ऐसे बदलाव देखे गए, जो केवल लंबे समय तक तंबाकू के भारी सेवन से जुड़े हुए थे। यह असर धीरे-धीरे होता है, जिससे शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले लेता है।
इस महत्वपूर्ण शोध को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। लखनऊ में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. राघवेंद्र विदुआ को इस अध्ययन के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि यह शोध डॉ. संगीता, लीना और डॉ. अश्वनी के सहयोग से पूरा हुआ।
डॉ. विदुआ का कहना है कि यदि आने वाली पीढ़ी और खुशहाल परिवार की कामना है, तो तंबाकू से दूरी बनाना जरूरी है। तंबाकू का असर शरीर पर चुपचाप लेकिन गहराई से पड़ता है, जिसका खामियाजा भविष्य में गंभीर रूप में सामने आ सकता है।





