कैनवास पर उभरा घोड़ों का शौर्य, कलाकार मनीष कुमावत की कला प्रदर्शनी शुरू

जयपुर के जवाहर कला केंद्र की चतुर्दिक आर्ट गैलरी में उभरते कलाकार मनीष कुमावत की तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी ऊर्जा-द्वितीय का शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी में घोड़े को केंद्र में रखकर बनाई गई करीब 200 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें शक्ति, गति, सौंदर्य और शौर्य की भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ कवि, कथाकार और कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने किया। इस अवसर पर कला प्रेमियों और दर्शकों की अच्छी मौजूदगी रही। कलाकार ने अपनी पेंटिंग्स में घोड़े की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक भूमिका को अलग-अलग दृष्टिकोण से कैनवास पर उतारा है।
मनीष कुमावत ने बताया कि घोड़ा मानव सभ्यता का अभिन्न हिस्सा रहा है और कला में यह शक्ति व संवेदनाओं का सशक्त प्रतीक बन सकता है। प्रदर्शनी में रंगीन और ब्लैक एंड व्हाइट थीम पर आधारित चित्र शामिल हैं, जिनमें कहीं घोड़े की ऊर्जा दिखाई देती है तो कहीं उसकी मासूमियत और सौंदर्य।
कलाकार की कृतियों में घोड़े को केवल एक जीव के रूप में नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। कई पेंटिंग्स में घोड़े के साथ प्राकृतिक परिवेश और गतिशीलता को उकेरा गया है, जो दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।
यह कला प्रदर्शनी 15 दिसंबर तक आमजन के अवलोकन के लिए खुली रहेगी, जहां कला प्रेमी घोड़ों के माध्यम से व्यक्त की गई शक्ति और शौर्य की इस अनूठी गाथा को करीब से महसूस कर सकेंगे।





