भारत में बढ़ती आर्थिक खाई, शीर्ष 10% के पास दो-तिहाई से अधिक संपत्ति

भारत में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई लगातार गहरी होती जा रही है। वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार देश में आर्थिक असमानता दुनिया में सबसे अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 58 प्रतिशत और कुल संपत्ति का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के पास सिर्फ 6.4 प्रतिशत संपत्ति ही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमीर और गरीब के बीच अंतर तेजी से बढ़ा है और उदारीकरण के बाद यह असमानता और तेज हुई है। भारत की शीर्ष 1 प्रतिशत आबादी राष्ट्रीय आय का 22.6 प्रतिशत कमाती है, जो 1922 के बाद से सबसे अधिक है। इतना ही नहीं, देश की कुल संपत्ति का 40.1 प्रतिशत हिस्सा अब सिर्फ 1 प्रतिशत अमीरों के पास है, जो 1961 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

अर्थशास्त्रियों नितिन कुमार भारती, लुकास चैंसल, थॉमस पिकेटी और अनमोल सोमांची द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में शामिल हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय 6,200 यूरो (PPP) और औसत संपत्ति 28,000 यूरो (PPP) है। महिलाओं की श्रम भागीदारी 15.7 प्रतिशत पर स्थिर है और पिछले एक दशक में इसमें कोई सुधार नहीं हुआ।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आर्थिक असमानता को कम करने के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर 2 प्रतिशत वार्षिक संपत्ति कर और 10 करोड़ रुपये से ऊपर की संपत्ति पर 33 प्रतिशत विरासत कर लगाया जाए। अध्ययन का कहना है कि अतिरिक्त टैक्स से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक असमानता इनकम, संपत्ति और जेंडर सभी स्तरों पर गहराई से जमी हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद संरचनात्मक विभाजन को दर्शाती है।

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