धुरंधर के बाद चर्चा में आया कराची का ‘ल्यारी’: मजदूरों की बस्ती कैसे बना अपराध का अड्डा?

बॉलीवुड फिल्म धुरंधर ने पाकिस्तानी शहर कराची के ल्यारी इलाके को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है. रणवीर सिंह, संजय दत्त और अक्षय खन्ना की इस थ्रिलर फिल्म में 2000 के दशक में ल्यारी में हुए गैंगवार और अपराध जगत की भयावह तस्वीर दिखाई गई है. यह वही इलाका है जिसे कभी ‘कराची की मां’ कहा जाता था. लेकिन समय के साथ मजदूरों की बस्ती अपराधियों का गढ़ बन गई और यहां ड्रग्स, रंगदारी, हथियारों के धंधे का बोलबाला हो गया.
कराची का सबसे पुराना इलाका
ल्यारी कराची का सबसे पुराना और बसावट वाला क्षेत्र माना जाता है. स्थानीय लोग इसे ‘कराची की मां’ कहते हैं, क्योंकि कराची का विकास इसी क्षेत्र से शुरू हुआ था. ल्यारी शब्द सिंधी भाषा के ‘ल्यार’ से निकला है, जिसका मतलब है—नदी किनारे उगने वाला पेड़. यह इलाका ल्यारी नदी और अरब सागर के तट पर बसे सिंधी मछुआरों और बलूच खानाबदोशों का शुरुआती निवास स्थान था.
1725 में सिंधी बनियों ने बढ़ाई बसावट
साल 1725 में सिंधी बनिए सबसे पहले यहां पहुंचे और धीरे-धीरे ल्यारी की बसावट बढ़ाने लगे. 1729 में कराची की औपचारिक स्थापना हुई. 1770 से 1795 के बीच बड़ी संख्या में बलूच प्रवासी यहां आकर बसते गए. ब्रिटिश शासनकाल में भी बलूचिस्तान से आने वाले प्रवासियों की संख्या बढ़ी. 1886 तक यहां की जनसंख्या 24 हजार से ज्यादा हो गई थी.
मजदूरों का इलाका क्यों बना?
क्योंकि ल्यारी नदी के पार था, इसलिए अंग्रेजों ने इसका विकास प्राथमिकता में नहीं रखा. उद्योग और बंदरगाह के नजदीक होने के कारण यहां मजदूर, कारीगर और छोटे व्यापारी बसते गए. धीरे-धीरे यह कराची का पहला ‘वर्किंग क्लास एरिया’ बन गया. बेतरतीब विकास, मिट्टी की ईंटों के घर और घनी आबादी इसकी पहचान बनती गई.
उपेक्षा और बढ़ती आबादी
1941 तक ल्यारी की आबादी 81 हजार के पार पहुंच गई. भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद भी इस इलाके की उपेक्षा होती रही. 1956 तक यहां की जनसंख्या साढ़े तीन लाख के पार थी. कई समुदायों—सिंधी, बलूच, उर्दू, पंजाबी और पश्तून—का मिश्रण होने के कारण यह सांस्कृतिक रूप से विविध क्षेत्र बन गया.
कराची की पहचान गढ़ने वाला इलाका
कामगार वर्ग ने न सिर्फ कराची की नींव रखी, बल्कि बंदरगाह चलाने से लेकर खेल जगत में भी बड़ा योगदान दिया. फुटबॉल और मुक्केबाजी में यहां से कई सितारे निकले. यही कारण है कि यह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का मजबूत वोटबैंक और बेनजीर भुट्टो का निर्वाचन क्षेत्र भी रहा.
अपराधियों का अड्डा कैसे बना ल्यारी?
1960 के दशक में ड्रग्स गैंग का उदय हुआ. नशे का धंधा, रंगदारी और जबरन वसूली बढ़ने लगी. पानी की टैंकर माफिया के बीच खूनी संघर्ष शुरू हो गए. 1990 के दशक में पेशेवर डकैतों का कब्जा हो गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, कई गैंगों को राजनीतिक संरक्षण भी मिला. 2000 के दशक में गैंगवार ने सैकड़ों जानें ले लीं और ल्यारी ‘नो-गो ज़ोन’ बन गया.
पाकिस्तान सरकार ने कई ऑपरेशन चलाए और 2016-17 के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य होने लगी.
आज का ल्यारी
2023 की जनगणना के मुताबिक, ल्यारी की आबादी लगभग 10 लाख है. सांस्कृतिक विविधता, खेल प्रतिभा और पुराने इतिहास के बावजूद यह इलाका अपराध की काली छाया से लंबे समय तक जूझता रहा. यही कारण है कि इसे कराची की मां कहा जाता है, लेकिन समय के साथ इसकी पहचान भय और गैंगवार से भी जुड़ गई.





