शादी के बाद पत्नी की मिर्गी छुपाने पर हाईकोर्ट ने कहा यह क्रूरता, पति को तलाक मंजूर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी के बाद अपनी बीमारी को छिपाना क्रूरता की श्रेणी में आता है। मंडला निवासी महेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी से विवाह विच्छेद की मांग की थी, जो कुटुंब न्यायालय द्वारा अस्वीकार कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि विवाह के बाद उसे पता चला कि उसकी पत्नी मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त है, जबकि यह बात ससुराल पक्ष से छिपाई गई थी। मिर्गी के दौरे बार-बार पड़ने लगे, तब यह सच सामने आया। पूछताछ के दौरान पत्नी और उसके मायके वालों ने इस बीमारी की बात से इंकार किया। हाईकोर्ट ने पति का पक्ष मानते हुए विवाह विच्छेद की मांग को मंजूरी दे दी।

उल्लेखनीय है कि जबलपुर कुटुंब न्यायालय ने हिंदू पति और मुस्लिम पत्नी के बीच हुए विवाह शून्यीकरण के आवेदन को भी अस्वीकार किया। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम-1955 की आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण यह विवाह प्रारंभ से ही शून्य था। विवाह का संपर्क इंटरनेट के माध्यम से हुआ और मंदिर में समारोह संपन्न हुआ।

हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की बीमारी छुपाकर विवाह करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से गंभीर अपराध माना जाता है, और ऐसी स्थिति में पति को तलाक का अधिकार है।

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