ग्वालियर में बढ़ रही बच्चों में हाइपर एक्टिविटी की समस्या, मामूली बात पर घर छोड़कर भाग रहे कई बच्चे

ग्वालियर में बच्चों के घर छोड़कर भागने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर संभ्रांत परिवारों में। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान जब पुलिस ने गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनकी काउंसलिंग की, तो पता चला कि अधिकांश बच्चे अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) जैसी समस्या के शिकार हैं। छोटी-छोटी बातों, डांट या रोक-टोक को वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे और गुस्से में घर छोड़कर भाग जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कई मामलों में बच्चे सिर्फ इसलिए घर से भाग गए क्योंकि उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने से रोका गया या पढ़ाई के लिए डांटा गया। इन बच्चों के इस व्यवहार ने पुलिस और परिवारों दोनों को चौंका दिया है।
काउंसलिंग के दौरान सामने आए कुछ मामले यह संकेत देते हैं कि बच्चों की संवेदनशीलता और सहनशीलता में कमी आई है। जैसे कि 10 वर्षीय एक छात्र अपने पिता की डांट से नाराज़ होकर घर छोड़कर चला गया, जिससे पूरा तंत्र अपहरण की आशंका में सक्रिय हो गया। वहीं एक किशोर माता-पिता द्वारा मोबाइल रोकने पर सुसाइड नोट छोड़कर गायब हो गया।
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती हाइपर एक्टिविटी, अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल, संयुक्त परिवारों का अभाव, माता-पिता का व्यस्त रहना और बच्चों की हर मांग तुरंत पूरी करना—ये सभी कारण इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। बच्चे इंटरनेट को साथी मानने लगे हैं, ऐसे में घर की छोटी रोक-टोक भी उन्हें असहज कर देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब स्मार्ट पैरेंटिंग की जरूरत है। बच्चों के साथ समय बिताना, उनके साथ कम से कम एक बार भोजन करना, उनके सामने मोबाइल कम इस्तेमाल करना और घर में तनावपूर्ण माहौल से बचना जरूरी है। साथ ही, मोबाइल उपयोग पर पैरेंटल कंट्रोल एप का उपयोग भी मददगार हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, काउंसलिंग में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें बच्चे गुस्से में घर छोड़कर चले गए। बढ़ती घटनाएं चेतावनी देती हैं कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।





