स्वामी विवेकानंद अस्पताल पर गंभीर आरोप:एंबुलेंस की सेटिंग में फंसा गरीब मरीज, इलाज के नाम पर लूट का खुलासा

बिलासपुर। शहर के स्वामी विवेकानंद अस्पताल पर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोरबा और आसपास के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल और एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाने की बजाय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद इलाज के नाम पर उनसे भारी रकम वसूली गई। यह मामला गरीब मरीजों के साथ धोखाधड़ी और अस्पताल माफिया की गहरी सेटिंग की ओर साफ इशारा करता है।
पीड़ित परिवारों के अनुसार, उनके बीमार रिश्तेदार को पहले कोरबा के 100 बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए मरीज को बिलासपुर सिम्स रेफर किया। इसी दौरान एंबुलेंस चालक ने उन्हें बताया कि वह मरीज को सरकारी अस्पताल ले जा रहा है, लेकिन उसने सीधे स्वामी विवेकानंद अस्पताल में भर्ती करा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें धोखे में रखा गया और बताया गया कि यह भी सरकारी अस्पताल है।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद असली खेल शुरू हुआ। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर बार-बार पैसे जमा करने का दबाव बनाया। जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड का उपयोग करने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने साफ इंकार कर दिया और कहा—“यहां आयुष्मान कार्ड नहीं चलता।” मजबूरी में किसी ने अपना घर गिरवी रखा, किसी ने खेत बेच दिया, सिर्फ इसलिए कि इलाज जारी रह सके।
इधर जब मीडिया ने अस्पताल से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो प्रबंधन ने कोई जवाब देने से इनकार कर दिया।
अब बड़े सवाल उठ रहे हैं-
क्या सच में इस अस्पताल में आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं किया जाता?
कोरबा के सरकारी अस्पताल से बिलासपुर के निजी अस्पताल तक मरीज को मोड़ने में एंबुलेंस चालक और अस्पताल की क्या सेटिंग है?
क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा या फिर मामला दब जाएगा?
गरीब मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहते हैं, लेकिन एंबुलेंस चालकों की मनमानी उन्हें निजी अस्पतालों में धकेल रही है। यह न सिर्फ गंभीर लापरवाही है बल्कि गरीबों के साथ खुला अन्याय भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।






