मध्य प्रदेश सरकार सरकारी स्कूल के 300 विद्यार्थियों को गुजरात भेजेगी राष्ट्र कथा शिविर में भाग लेने

मध्य प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों के 300 विद्यार्थियों को गुजरात में आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्र कथा शिविर में भेजने की तैयारी कर रही है। यह शिविर 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री वैदिक मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें स्वामी धर्मबंधु की राष्ट्र कथा सुनाई जाएगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों को पत्र लिखकर विद्यार्थियों की सूची मांगी है। प्राचार्यों का कहना है कि अधिकांश शिक्षक फिलहाल चुनाव ड्यूटी में तैनात हैं, जिससे शिक्षकों की उपलब्धता सीमित है। इस समय में विद्यार्थियों की प्री-बोर्ड, बोर्ड और वार्षिक परीक्षाएं भी होने वाली हैं, इसलिए इस शिविर के लिए विद्यार्थियों का चयन विवादित माना जा रहा है।

शिविर में नौवीं से 12वीं कक्षा के एक स्कूल के तीन विद्यार्थियों को भेजा जाएगा, जिनमें 10वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, एक भारत श्रेष्ठ भारत, कला उत्सव और अन्य प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन भी किया जाएगा। इस आयोजन में लगभग 100 शिक्षकों को भी विद्यार्थियों के साथ भेजा जाएगा। विभाग के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी पर 14,000 रुपये खर्च होंगे।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस राष्ट्र कथा कक्षा शिविर में भाग लेने से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास होगा। राज्य शिक्षा संचालनालय के उप संचालक पीके सिंह ने बताया, “इस शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का व्यक्तित्व, अनुशासन और सामाजिक जागरूकता में सुधार होगा।”

स्कूलों से सूची प्राप्त करने के बाद चयनित विद्यार्थियों और शिक्षकों की यात्रा की तैयारी शुरू की जाएगी। इसके तहत विद्यार्थियों को यात्रा के दौरान भोजन, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की इस 10 दिवसीय यात्रा का उद्देश्य न केवल शिक्षा के अतिरिक्त अनुभव प्रदान करना है, बल्कि राष्ट्रवाद और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करना है। हालांकि, कुछ प्राचार्य इस समय के बीच शिविर आयोजित करने पर चिंता जता रहे हैं, क्योंकि परीक्षाओं के दबाव के चलते विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कार्यक्रमों में भाग लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस तरह, मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुआयामी विकास का अवसर देना है, जबकि प्रशासन और शिक्षक इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रबंधित कर रहे हैं।

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