पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल के भाई की हत्या मामले में हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

बिलासपुर। व्यवसायी और पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल के बड़े भाई दशरथ खंडेलवाल की हत्या के मामले में बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरू की खंडपीठ ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास और धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत 10 साल कठोर कैद की सजा दी है। साथ ही दोनों पर 1000-1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह घटना 22 नवंबर 2013 की है। दो युवक लूट की नीयत से 36 मॉल के पास स्थित खंडेलवाल परिवार के घर में घुसे थे। उन्होंने दरवाजा खोलने वाली विमला देवी पर हमला किया और जब घर के मालिक दशरथ खंडेलवाल ने विरोध किया, तो उन पर चाकू से वार कर हत्या कर दी। हमलावरों ने विमला देवी को घायल कर एक कमरे में बंद कर दिया और घर से घड़ी व मोबाइल लूटकर फरार हो गए।

जांच में पता चला कि आरोपी विक्की उर्फ मनोहर सिंह और उसका दोस्त विजय चौधरी वही लोग थे जो पहले भी घर में चिमनी ठीक करने आए थे। नशे की लत और कर्ज के कारण दोनों ने यह वारदात की थी।

पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था, लेकिन मई 2016 में निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ मृतक के बेटे अनिल खंडेलवाल और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी विमला देवी की गवाही विश्वसनीय है और मामूली विरोधाभास के कारण उसे खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत मानते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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