रायपुर प्रेस क्लब में चुनाव से पहले मचा बवाल, अध्यक्ष और महासचिव आमने-सामने- क्लब दो गुटों में बंटा

रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब में संभावित चुनाव से पहले खींचतान अपने चरम पर पहुंच गई है। क्लब में सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। संविधान संशोधन, सदस्यों के नाम जोड़े या काटे जाने के मुद्दे पर महीनों से असहमति बनी हुई है। अब पंजीयक के निर्देश आने के बाद मतभेद और बढ़ गए हैं।
विवाद तब गहराया जब महासचिव डॉ. शिव वैभव पांडेय ने पंजीयक के निर्देशों के अनुसार 60 दिन के भीतर चुनाव कराने और नई सदस्यता प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। लेकिन कार्यवाहक अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने इस आदेश को मानने से इंकार कर दिया और सूचना पट्ट पर चिपकाए गए आदेश को फाड़ दिया।
अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर का कहना है कि सदस्यता शुल्क और नए सदस्य जोड़ने पर कोई समझौता नहीं होगा, जबकि महासचिव का कहना है कि वे केवल पंजीयक और सोसायटी के आदेशों का पालन कर रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आदेश किसका माना जाए – अध्यक्ष का या पंजीयक का? इस भ्रम ने प्रेस क्लब को दो खेमों में बांट दिया है। कई सदस्य अब खुलकर दो पक्षों में बंट गए हैं, जिससे क्लब का माहौल गरमा गया है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने चिंता जताई है कि अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो प्रेस क्लब की साख को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि चुनाव किसी निष्पक्ष अधिकारी की निगरानी में कराए जाने चाहिए।
जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने करीब 253 नए सदस्य जोड़े और 125 पुराने सदस्यों के नाम हटाने की कोशिश की है। इससे क्लब का वोट समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। परंपरा रही है कि चुनाव से ठीक पहले नए सदस्यों को वोटिंग अधिकार नहीं दिए जाते, लेकिन इस बार अध्यक्ष ने इस नियम को भी नजरअंदाज कर दिया है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रेस क्लब व्यक्तिगत अहंकार का मंच नहीं, बल्कि पत्रकारों की गरिमा का प्रतीक है। ऐसे विवाद पहली बार 1968 में गठन के बाद इस स्तर पर देखे जा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।





