छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर बिलासपुर जेल में शुरू हुई विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला, बंदियों के समग्र विकास पर फोकस

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय जेल बिलासपुर में 3 अक्टूबर से रजत जयंती कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई है। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर तक चलेंगे। इनका उद्देश्य बंदियों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना है।
जेल अधीक्षक श्री मंडावी ने बताया कि यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि बंदियों के समग्र विकास की पहल है। कार्यक्रमों के जरिए उन्हें सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
3 अक्टूबर को कार्यक्रम की शुरुआत जेलों के आधुनिकीकरण पर चर्चा के साथ हुई। 4 अक्टूबर से आर्ट ऑफ लिविंग योग संस्थान द्वारा पुरुष और महिला बंदियों के लिए छह दिवसीय “हैप्पीनेस प्रोग्राम” शुरू किया गया। इसी दिन राज्य मानसिक चिकित्सालय, सेंदरी की टीम ने 50 मनोरोगी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और शतरंज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
5 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण के जरिए बंदियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। 6 अक्टूबर को नशा मुक्ति शिविर आयोजित हुआ, जिसमें बंदियों ने अपने अनुभव साझा किए और नशा छोड़ने का संकल्प लिया।
7 अक्टूबर को ब्रह्मकुमारी संस्था की कार्यशाला में आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन पर प्रशिक्षण दिया गया। 8 अक्टूबर को विधिक सहायता और रक्तदान शिविर आयोजित हुए, जिनमें कलेक्टर बिलासपुर ने भी जेल का निरीक्षण किया। 9 अक्टूबर को महिला प्रकोष्ठ में रंगोली और पेंटिंग प्रतियोगिता से बंदियों की कला प्रतिभा को मंच मिला।
जेल अधीक्षक मंडावी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। इससे जेल में सकारात्मक माहौल बनता है और बंदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया मजबूत होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, योग, कला, खेल और सामाजिक गतिविधियों से बंदियों में मानसिक शांति, आत्मनियंत्रण और सहयोग की भावना बढ़ती है। यह पहल छत्तीसगढ़ की 25वीं वर्षगांठ पर बंदियों के लिए एक प्रेरणादायक और मानवीय प्रयास साबित हो रही है।





