छत्तीसगढ़ में बांधों से गाद हटाने के लिए पहली बार बनेगी सेडीमेंट्रेशन पॉलिसी
पीपीपी मॉडल पर होगी कार्रवाई

रायपुर। प्रदेश में बांधों में लगातार बढ़ रही गाद की समस्या से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने विशेष पहल शुरू की है। विभाग के सर्वे के अनुसार प्रदेश के 23 बांधों में अब तक 8.7% तक गाद जमा हो चुकी है। खासतौर पर सोंढुर, क्षीरपानी, खमारपाकुट, बहेरखार और मतियामोटी बांधों में 29 से 40 साल के भीतर ही 27% तक गाद भर चुकी है। आमतौर पर यह स्तर 75 साल में पहुंचता है। गाद जमने की इस तेज गति से बांधों की जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो रही है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य में पहली बार सेडीमेंट्रेशन पॉलिसी तैयार की जा रही है। इसके लिए विभाग ने ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना की नीतियों का अध्ययन किया है। अब छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के अनुसार ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार कर ली गई है। पॉलिसी के तहत पीपीपी मॉडल पर बांधों से गाद निकाली जाएगी। इसमें राजस्व बंटवारे और संचालन पर अंतिम निर्णय बाकी है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार पॉलिसी लागू होने पर सिल्ट हटाने के काम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और गाइडलाइन भी बनाई जाएगी। प्रस्ताव को कैबिनेट और फिर विधानसभा में पेश किया जाएगा। टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक बांध के लिए अलग प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई जाएगी।
पॉलिसी के तहत दो मॉडल पर जोर दिया गया है। पहले मॉडल में एजेंसी अपने खर्च पर गाद निकालकर उसका भंडारण और निपटान करेगी। दूसरे मॉडल में गाद से निकले रेत व अन्य सामग्री की बिक्री से राजस्व प्राप्त कर जल संसाधन विभाग को तय राशि दी जाएगी। यह पहल बांधों की क्षमता बढ़ाने, जल संकट से निपटने और सतत जल प्रबंधन की दिशा में राज्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।





