BIG NEWS: बिहार के 52 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे
चुनाव आयोग द्वारा जारी किए आधिकारिक आंकड़े

नई दिल्ली: बिहार में चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 52 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। यह कदम 2025 विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे “Special Intensive Revision” (SIR) अभियान के तहत उठाया जा रहा है।
मुख्य कारण, जिनके चलते ये नाम हटाए जा रहे हैं:
मृत मतदाता: 18,66,869 लोग ऐसे पाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम अब तक वोटर लिस्ट में बने थे।
स्थानांतरित मतदाता: 26,01,031 मतदाता स्थायी रूप से बिहार या क्षेत्र से बाहर चले गए हैं।
डुप्लिकेट नाम: 7,50,742 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए।
अज्ञात/ट्रेसलेस: 11,484 ऐसे मतदाता हैं जिनका पता नहीं मिल पाया।
चुनाव आयोग का कहना है कि 1 अगस्त 2025 को जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी, उसमें ये बदलाव परिलक्षित होंगे। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित होगी। 1 अगस्त से 1 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है ताकि अगर गलती से किसी योग्य मतदाता का नाम कट गया हो, तो उसे दोबारा जोड़ा जा सके।
इस बड़े आंकड़े पर विपक्ष का आरोप है कि यह “अयोग्य” वोटरों की आड़ में सत्तापक्ष के खिलाफ़ वोटर्स को बाहर रखने की साजिश है। विपक्षी पार्टियाँ और कुछ राजनीतिक विश्लेषक खास तौर पर गरीब, प्रवासी, असंतुष्ट या अल्पसंख्यक समूहों के नाम हटाए जाने की बात कह रहे हैं।
वहीं बीजेपी सहित सत्तापक्ष इस कदम को “मतदाता सूची की शुद्धि” और निष्पक्षता के लिए ज़रूरी बता रहा है, साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया पहले भी हो चुकी है और पारदर्शी तरीके से चल रही है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 1 अगस्त 2025 को आएगी।
अंतिम सूची 30 सितंबर 2025 को जारी होगी।
यदि किसी का नाम गलती से हटा है, तो वे 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच आवेदन कर सकते हैं।
यह अभियान सभी दलों के प्रतिनिधियों की निगरानी और आपत्ति के अधिकार के साथ चल रहा है।
कुल मिलाकर बिहार में करीब 52 लाख मतदाताओं के नाम विभिन्न वैध कारणों से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया और प्रभाव को लेकर सियासी विवाद और बहस जारी है।





