महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी विवाद: उद्धव ठाकरे ने बोली मराठी अस्मिता की बात

मुंबई। महाराष्ट्र में जारी हिंदी-मराठी भाषा विवाद अब धार्मिक भावनाओं तक पहुंच गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 19 जुलाई को स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी किसी भी भाषा का विरोध नहीं करती, लेकिन हिंदी को जबरन नहीं स्वीकार करेगी। उन्होंने कहा कि जैसे हम मराठी किसी पर नहीं थोपते, वैसे ही हम पर भी कोई भाषा थोपने की कोशिश न करे।

उद्धव ने भगवान हनुमान की भक्ति का उदाहरण देते हुए कहा, “हम मारुति स्तोत्र मराठी में पढ़ते हैं, आप हनुमान चालीसा पढ़िए। हनुमान तो एक ही हैं।” उन्होंने इस विवाद के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह मराठी अस्मिता को दबाने की साजिश है, जिसे अब मराठी माणूस सहन नहीं करेगा।

उद्धव ठाकरे ने धारावी पुनर्विकास, पर्यावरण, और सार्वजनिक संपत्तियों की लूट का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार पर संविधान न मानने और देश को व्यापार के लिए बेचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अब मराठी माणूस शांत नहीं बैठेगा, उसकी सहनशीलता की सीमा पार हो चुकी है।

इस दौरान उन्होंने राज ठाकरे के साथ 5 जुलाई को निकाले गए संयुक्त मराठी मोर्चे को मराठी स्वाभिमान की नई लहर बताया। उन्होंने कहा कि मराठी, हिंदी, गुजराती समेत अन्य भाषाओं के लोगों को भी इस एकता से खुशी हुई। उद्धव ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना मराठी अस्मिता और धारावीकरों के हक के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है।

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