जुहली गांव की महिलाओं ने रच दिया इतिहास, 10 साल से नहीं हुआ कोई अपराध!

बिलासपुर:छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का एक छोटा-सा गांव है जुहली, जो आज पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन चुका है। इस गांव की 300 महिलाएं मिलकर ऐसा बदलाव लाई हैं, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

न डिग्री, न ओहदा, सिर्फ हौसला और जज्बा

इन महिलाओं के पास कोई सरकारी पद या बड़ी डिग्री नहीं है, लेकिन उनके हौसले इतने मजबूत हैं कि उन्होंने अपने गांव को अपराध मुक्त आदर्श ग्राम बना दिया है। ये महिलाएं खुद को “चेतना प्रहरी” कहती हैं — यानी समाज को जागरूक करने वाली प्रहरी।

हर दिन होती है महिलाओं की बैठक

कभी जुहली गांव में कच्ची शराब का धंधा होता था और नशा आम बात थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। हर सुबह गांव की महिलाएं एक जगह जुटती हैं, समाज सुधार पर चर्चा करती हैं, और अगर कहीं कोई गलत बात दिखती है तो तुरंत एक्शन लिया जाता है।

थाने में नहीं पहुंचा कोई केस

बीते 10 से 15 सालों में इस गांव से एक भी आपराधिक केस थाने नहीं पहुंचा है। सीपत थाना प्रभारी गोपाल सतपथी भी मानते हैं कि जुहली गांव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक आदर्श बन गया है।

अगर कोई गलती करता है, तो पहले महिलाएं समझाती हैं। नहीं मानने पर पंचायत बैठती है और समुदाय मिलकर फैसला करता है।

जुहली की यह जागरूकता अब आसपास के गांवों तक फैल रही है। वहां के लोग भी इससे प्रेरित होकर अपने गांवों को सुधारने में जुटे हैं। जुहली की महिलाएं कहती हैं – “अगर समाज बदलना है तो शुरुआत खुद से करनी होगी।”

र उन्होंने सच में दिखा दिया कि बदलाव लाने के लिए न कोई पद चाहिए, न ताकत ,बस हिम्मत और एकता चाहिए।

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