डोंगरगढ़ में स्वेच्छानुदान मद पर विवाद, भाजपा नेताओं को मिली सहायता पर उठे सवाल

डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से जारी की गई आर्थिक सहायता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस कोष से भाजपा पदाधिकारियों को लाभ पहुंचाया गया, जो न केवल सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सक्षम माने जाते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सीधी बंदरबांट” करार दिया। खैरागढ़ जिले के ग्राम मूढ़ीपार में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल हुए बघेल ने मीडिया से कहा, “इस मद का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों की सहायता है, न कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं की सुविधा के लिए।”
डोंगरगढ़ में जिन लोगों को अनुदान मिला है, उनमें भाजपा शहर मंडल के महामंत्री विनीत यादव, विनय बंसल, महिला मोर्चा अध्यक्ष सविता दरगढ़, युवा मोर्चा अध्यक्ष सुमीत मिश्रा, कोषाध्यक्ष भागवत नामदेव, उपाध्यक्ष वत्सला श्रीवास्तव, बूथ अध्यक्ष कमलेश उज्जवने और कार्यकर्ता कन्हैया अग्रवाल जैसे नाम शामिल हैं।
इन नामों के सामने आने के बाद क्षेत्र में भ्रष्टाचार और पक्षपात को लेकर व्यापक आक्रोश है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके लंबे समय से किए गए आवेदन अब भी लंबित हैं, जबकि राजनीतिक पहचान रखने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने और जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। इस मामले ने मुख्यमंत्री अनुदान वितरण की पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं में सत्ता के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





