युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का विरोध, शिक्षकों ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

बिलासपुर
युक्तियुक्तकरण
छत्तीसगढ़ में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों का विरोध लगातार तेज़ होता जा रहा है। शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मनमानी के आरोप लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूलों की सूची और अतिशेष शिक्षकों के चयन में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। जिन शिक्षकों को आवश्यकतानुसार स्थान पर पदस्थ किया जाना था, उन्हें असंगत स्थानों पर ट्रांसफर कर दिया गया है, वहीं कई योग्य शिक्षकों को बिना उचित कारण अतिशेष घोषित कर दिया गया।
जिसके बाद कर्मचारी संगठनों और शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि युक्तियुक्तकरण की यह प्रक्रिया शिक्षा के अधिकार अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मापदंडों के विपरीत की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर एकल शिक्षक विद्यालयों को नज़रअंदाज़ कर चहेतों को लाभ पहुँचाया गया है।
कर्मचारी संघ ने यह मांग रखी है की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, दावा-आपत्ति के लिए उचित समय और मंच दिया जाए, सूची की समीक्षा कर वास्तविक ज़रूरतों के आधार पर संशोधन किया जाए साथ ही जिम्मेदार अफसरों पर जांच और कार्रवाई की जाए
इस विरोध के बीच व्याख्याता रोहित कुमार साहू ने मीडिया से चर्चा में स्पष्ट रूप से कहा कि, अगर मेरा ट्रांसफर जबरदस्ती नहीं रोका गया और इस प्रक्रिया की विसंगतियों को सुधारा नहीं गया, तो मैं न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाऊंगा।
उन्होंने यह भी बताया कि सूची में कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो न तो अतिशेष की श्रेणी में आते हैं, न ही उनकी पदस्थापना असंगत है। इससे योग्य और जरूरतमंद शिक्षकों को नुकसान हो रहा है।
राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल बताया है, खासकर उन स्कूलों के लिए जहां शिक्षक नहीं हैं या केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है।
लेकिन ज़मीनी स्तर पर इस प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।
बिना दावा-आपत्ति के निष्पादन, काउंसलिंग के दौरान सूचनाओं की कमी और सूची में छेड़छाड़ जैसे आरोपों ने इस पूरी कवायद की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।





