युक्तियुक्तकरण में गड़बड़ी पर कलेक्टर का सख्त रुख, बोले- पहले FIR फिर विभागीय कार्रवाई

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई स्कूलों में आंकड़ों की हेराफेरी करके शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली की जा रही है। जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, कलेक्टर कुंदन कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे डाली।

क्या है युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया

युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्कूल में छात्रों की संख्या के अनुपात में ही शिक्षकों की नियुक्ति हो। इस प्रक्रिया के तहत अतिशेष शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाता है ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके। लेकिन मुंगेली में इस व्यवस्था को ही मनमानी का हथियार बना लिया गया।

गड़बड़ियों की प्रमुख शिकायतें

छात्र संख्या में हेराफेरी: कुछ स्कूलों में जानबूझकर छात्रों की संख्या अधिक दिखाकर अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ किया गया।

स्कूलों की दूरी का गलत विवरण: युक्तियुक्तकरण में विद्यालयों के बीच की दूरी का बड़ा महत्व होता है, लेकिन इसमें गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए।

अतिशेष शिक्षकों को छुपाना: जिन शिक्षकों की जरूरत नहीं है, उन्हें कागजों में जरूरी दिखाकर उसी स्कूल में रोके रखने की कोशिश की गई।

गैरहाजिर बच्चों को उपस्थिति में दिखाना: महीनों से अनुपस्थित छात्रों को भी हाजिरी में दिखाकर संख्या बढ़ाई गई जिससे शिक्षक पदों को बचाया जा सके।

कलेक्टर की सख्त चेतावनी: ‘कानूनी कार्रवाई पहले होगी’

कलेक्टर कुंदन कुमार ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि

“युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कोई भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो पहले एफआईआर होगी, फिर विभागीय कार्रवाई। यह अंतिम चेतावनी है।”

उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी चंद्र कुमार धृतलहरे और डीएमसी प्रभारी अजय नाथ को सीधे-सीधे चेतावनी दी। साथ ही सभी BEO (खंड शिक्षा अधिकारी) और BRC (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) को पारदर्शिता बनाए रखने का निर्देश दिया।

शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

कलेक्टर की इस चेतावनी के बाद मुंगेली शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी मच गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली है और अब वे अपने बचाव में लगे हुए हैं। यह मामला शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या DEO और DMC पर कार्रवाई होगी? क्या यह मामला एफआईआर तक पहुंचेगा या दबा दिया जाएगा? क्या शिक्षा विभाग अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाएगा?

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