Illegal possession: अधिकारियों की चूक या मिलीभगत, 100 साल पुराने नाले पर कब्जे का खेल, अब जागा निगम प्रशासन

Illegal possession: बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की ओर से जवाली नाले के किनारे अवैध रूप से बने मकानों और दुकानों को गिराने की कार्रवाई की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। बुधवार को निगम की भवन शाखा ने अधूरी नापजोख की प्रक्रिया को पूरा किया। इस दौरान कई विसंगतियां भी सामने आईं, जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बीते कुछ दिनों से नगर निगम द्वारा जवाली नाले के दोनों ओर हुए अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है।
इनमें कई मकान और दुकानें ऐसी हैं जो नियमों के खिलाफ बनी पाई गईं, जिन पर मार्किंग की जा चुकी है। निगम की भवन शाखा की टीम ने मौके पर पहुंचकर नक्शे के आधार पर निर्माणों की जांच की और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। बताया जा रहा है कि नाले के किनारे बने कई मकान इस कार्रवाई की जद में आ रहे हैं, जिनके टूटने से मकान मालिकों और दुकानदारों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ऐसे में स्थानीय लोग और निर्माणकर्ता अब नगर निगम से राहत की गुहार लगा रहे हैं और इस कार्रवाई में बीच का रास्ता निकालने की मांग कर रहे हैं। हालांकि निगम की ओर से अभी सिर्फ प्राथमिक चरण की प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। इस पूरी योजना को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति भी दर्ज कराई है, जिस पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नगर निगम अभियंता जुगल सिंह ने बताया कि, नापजोख का कार्य नियमानुसार किया जा रहा है।
सभी निर्माणों की जांच नक्शे के आधार पर की जा रही है और अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया है। आगे की कार्रवाई नियमों के तहत की जाएगी। गौरतलब है कि 100 साल से भी अधिक पुराने इस जवाली नाले पर नगर निगम ने कुछ वर्ष पूर्व सड़क निर्माण कर लोगों को वैकल्पिक मार्ग की सुविधा दी थी। लेकिन समय के साथ नाले के किनारे अवैध निर्माण की भरमार हो गई। अब जब नगर निगम इन्हें हटाने की प्रक्रिया में जुटा है, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि जब ये निर्माण हो रहे थे तब निगम अधिकारी कहां थे? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में निगम अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं की मिलीभगत रही है। उनका कहना है कि जांच केवल निर्माणकर्ताओं पर ही नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी होनी चाहिए जो इस दौरान अपनी जिम्मेदारी से चूक गए।





