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फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं का समाधान, एथनॉल बनाने में होगा इस्तेमाल

भिलाई।  फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से बेहद नुकसान होता है..  खास कर के इसका हर्जाना पर्यावरण को भुगतना पड़ता है.. स्टील बनाने की प्रक्रिया में नुकसान और ज्यादा बढ़ जाता है.. क्योंकि इस प्रकिया में बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन होता है.. जिसे कई देश में कम करने की कोशिश में जुटे हुए हैं… वहीं.. अब छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट ने इसके लिए एक ऐसा तरीका ढुंढ निकाला है.. जिससे न सिर्फ प्रदुषण कम होगा.. बल्कि इससे कई फायदे भी होंगे..

दरअसल एक स्टील प्लांट प्रति टन इस्पात उत्पादन में लगभग 1.4 से 1.85 टन CO2 यानि कि कार्बन डाय ऑक्साइड उत्सर्जित करता है… जिसका मतलब अगर कोई स्टील प्लांट प्रतिदिन 10,000 टन इस्पात का उत्पादन करता है, तो वह लगभग 14,000 से 18,500 टन CO2 उत्सर्जित करेगा…वहीं भारत में, प्रति टन इस्पात उत्पादन के लिए 2.54 टन CO2 उत्सर्जित होता है… जबकि यूरोपियन स्टील कंपनी रुक्की 1 टन स्टील बनाने में, दुनिया में सबसे कम 1.8 से 2.3 टन कार्बन डाय ऑक्साइड का उत्सर्जन करती है…

वहीं भिलाई स्टील प्लांट यानि कि बीएसपी भी निरंतर इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.. कि कैसे इस उत्सर्जन को कम किया जाए.. जिसका bsp ने तरीका ढुंढ लिया है.. और अब bsp इस उत्सर्जित गैस का इस्तेमाल एथनॉल बनाने में करेगी… दरअसल स्टील बनाने की प्रक्रिया में कोयला, आयरन और, चूना पत्थर का इस्तेमाल किया जाता है,..जिसे गलाने के दौरान निकलने वाली गैसों का उपयोग bsp ईंधन के रूप में करता आया है.. वहीं अब BSP चिमनियों से निकलने वाली गैसों से एथेनॉल बनाने जा रहा है… इसके लिए सेल यानि कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने इसी कार्य में दक्ष श्रीराम कंपनी से अनुबंध किया है…

वहीं मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने इसका ट्रायल शुरू कर दिया है… ट्रायल खत्म होने के बाद चिमनियों से होते हुए वायुमंडल में जाने वाली प्रति 25 टन C02 गैस से 2.5 टन एथेनाल बनना शुरू हो जाएगा… जो देश में होने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन का 12% होता है…

चलिए अब जान लेते हैं कि इससे फायदा क्या होगा..

C02 से एथेनाल बनने से कार्बन उत्सर्जन के प्रतिशत में कमी आएगी

हर साल करीब 2.30 लाख टन कार्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा

इससे वायुमंडल में प्रदूषण की मात्रा भी कम होगी

एथेनाल खुले बाजार में बेचने से बीएसपी को आय भी होने लगेगी

साथ ही बीएसपी खुले बाजार में अपना स्टील कुछ सस्ता बेच सकेगी

 

वहीं प्रक्रिया के लिए bsp ने प्लांट के अंदर ही थर्मल पॉवर प्लांट लगाया गया है,.. जहां कोयला जलाकर बिजली तैयार की जाती है… कोयला जलने में जो कार्बन उत्सर्जन होता है.. उसे कम करने बीएसपी अब लोहा की प्रक्रिया के दौरान स्वत: बनने वाली गैस की कुछ मात्रा थर्मल पॉवर प्लांट भेजेगी..  इससे टर्बाइन चलाने में मदद ली जाएगी… जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि हर साल करीब 2.30 लाख टन कार्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा…

इसके अलावा कोक, आयरन, चूना पत्थर को आपस में मिलाने के लिए बहुत ज्यादा तापमान की जरूरत होती है..जो ब्लास्ट फर्नेस के जरिए मिलाए जाते हैं…  इसके लिए पहले गैस और बिजली इस्तेमाल होती है… तीनों के पिघलने के दौरान पुन: गैस बनती है.. जिसे अब ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जाएगा.. ..

वहीं स्टील प्लांट में, कई शहरों के बराबर बिजली एक दिन में खर्च हो जाती है… जिसका मुख्य स्रोत कोयला और पानी है..और दोनों का अधिक उपयोग प्रदूषण के बढ़ावा देता है… इसलिए सेल अपने यहां जैसे रोशनी, एसी, पंखा, पानी आदि की बिजली जरूरतें पुरा करने के लिए सोलर पैनल लगा रहा है.. जिसके लिए करीब 70 मेगा वॉट के सोलर प्लांट लगा रहे हैं..जिसे लेकर  मानना कि 1 मेगावॉट के प्लांट से हर साल वह 980 टन सीओ-2 उत्पादन कम करने में सफल होंगे… और एथनॉल उत्पादन में फायदा होगा..

बता दें कि एथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है, जिसे एथिल अल्कोहल भी कहते हैं.. इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.. और यह अक्षय ऊर्जा का स्रोत है.. इसके अलावा इसका उपयोग अन्य रसायनों के संश्लेषण में विलायक के रूप में भी किया जाता है.. साथ ही इसका उपयोग फार्मास्यूटिकल्स, लैकर, पॉलिश, प्लास्टिसाइजर और सौंदर्य प्रसाधनों के उत्पादन में भी किया जाता है…

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