छत्तीसगढ़ इस्पात क्षेत्र में क्रांति: ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों ने खोले विकास के नए द्वार

छत्तीसगढ़, जिसे देश का ‘इस्पात राज्य’ कहा जाता है, अब औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हाल ही में राज्य के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने घोषणा की कि राज्य को इस्पात क्षेत्र में ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह घोषणा स्टील इंडिया 2025 सम्मेलन में की गई, जो इस्पात मंत्रालय और फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

नई औद्योगिक नीति बनी विकास की रीढ़

मंत्री देवांगन के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने इस्पात क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक नीति तैयार की है। इस नीति में इस्पात जैसे मुख्य क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे राज्य निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।
“हम उद्योगों को विभिन्न प्रोत्साहन दे रहे हैं और इससे छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष निवेश आकर्षण वाले राज्यों में शामिल हो गया है,” – लखन लाल देवांगन

राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ा है इस्पात का भविष्य

मंत्री ने जोर देकर कहा कि मेक-इन-इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसे राष्ट्रीय मिशनों की सफलता इस्पात उद्योग पर निर्भर करती है। भारत पहले से ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है, और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में इस क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी।

उत्पादन लक्ष्य और बुनियादी ढांचे में उछाल

राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में लोहे के उत्पादन को 46 मिलियन टन से बढ़ाकर 65 मिलियन टन करना है। साथ ही, 2014 में 135 मिलियन टन कोयले का उत्पादन अब 207 मिलियन टन तक पहुंच गया है और 2030 तक इसे 400 मिलियन टन तक ले जाने की योजना है।

सड़कों से स्टील की शक्ति तक

धातु परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए सरकार ₹21,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं पर कार्य कर रही है, जिससे इस्पात उद्योग को लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल रहा है।

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