पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की संदिग्ध मौत फिर सुर्खियों में,

बिलासपुर | छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता पंडित राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की 2006 में हुई रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। 18 साल बाद बेटे डॉ. प्रदीप शुक्ला की शिकायत पर बिलासपुर के सरकंडा थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
डॉ. प्रदीप शुक्ला के अनुसार, उनके पिता को 2 अगस्त 2006 को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ICU में 18 दिन तक इलाज के नाम पर रखा गया, लेकिन उनकी हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उनकी मृत्यु हो गई।
अब जो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, उसके मुताबिक:
इलाज करने वाले डॉक्टर नरेंद्र विक्रम यादव की कार्डियोलॉजी की डिग्री फर्जी निकली। डॉक्टर का मेडिकल काउंसिल में कोई पंजीयन नहीं है।
अस्पताल प्रबंधन ने बिना जांच के ऐसे डॉक्टर को नियुक्त किया, जो पहले से ही मध्यप्रदेश के दमोह में कई मौत के मामलों में आरोपी है।
FIR दर्ज, अब चलेगी जांच
सरकंडा पुलिस ने डॉक्टर नरेंद्र विक्रम यादव और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ IPC की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
FIR में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है, उनमें धोखाधड़ी, कर्तव्य में लापरवाही और हत्या से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
सीएसपी सिद्धार्थ बघेल ने पुष्टि की है कि पूरे मामले की जांच गहराई से की जा रही है और अन्य दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
क्या बोले पीड़ित और पुलिस अधिकारी?
डॉ. प्रदीप शुक्ला (बेटे और शिकायतकर्ता) ने कहा –
“18 दिन तक मेरे पिता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता रहा। अब जाकर सच्चाई सामने आ पाई है। यह सिर्फ मेरे पिता के साथ नहीं, बल्कि मेडिकल सिस्टम की एक बड़ी चूक है।”
सीएसपी सिद्धार्थ बघेल ने बताया –
“डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद FIR दर्ज की गई है, जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की पात्रता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बिना वैध पंजीकरण वाले डॉक्टर द्वारा इलाज और उससे होने वाली मौत न केवल नैतिक अपराध है, बल्कि कानूनी अपराध भी है।





