‘केसरी चैप्टर 2’ रिलीज़ – शंकरन नायर की कहानी से उठी आज़ादी की गूंज

अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस बार कहानी रणभूमि से निकलकर न्याय की अदालत और राजनीति के गलियारों तक पहुंचती है। जहां तलवार नहीं, तर्क और हिम्मत सबसे बड़ा हथियार बनते हैं।
यह फिल्म 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड और उसके बाद उठी कानूनी, सामाजिक और राजनैतिक लड़ाई पर आधारित है। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम में सबसे मुखर और बेबाक आवाज़ थे — सर चेत्तूर शंकरन नायर, जिनकी भूमिका में अक्षय कुमार नज़र आ रहे हैं।
कौन थे शंकरन नायर?
11 जुलाई 1857 को केरल में जन्मे सर शंकरन नायर भारत के शुरुआती दौर के सबसे प्रतिष्ठित वकीलों और राष्ट्रवादी नेताओं में से एक थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय वह ब्रिटिश वायसराय की कार्यकारी परिषद में एकमात्र भारतीय सदस्य थे। जब यह दिल दहला देने वाली घटना हुई, तो उन्होंने तत्काल इस्तीफा देकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ सबसे बुलंद आवाज़ उठाई।
‘गांधी एंड एनार्की’ – वो किताब जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को झकझोर दिया
शंकरन नायर ने इसके बाद ‘Gandhi and Anarchy’ नाम की एक किताब लिखी, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उनकी यह किताब इतनी प्रभावशाली रही कि ब्रिटिश सरकार ने लंदन में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। लेकिन नायर न डरे, न झुके। उन्होंने यह केस मजबूती से लड़ा और जीत हासिल की।
फिल्म की खास बात
‘केसरी चैप्टर 2’ में अक्षय कुमार, शंकरन नायर के किरदार में गंभीरता, दृढ़ता और भावनाओं का अद्भुत संतुलन दिखा रहे हैं। फिल्म न केवल न्याय की लड़ाई को दिखाती है, बल्कि एक व्यक्ति के निजी संघर्ष, साहस और सिद्धांतों की जीत की कहानी भी कहती है।
इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ आर. माधवन और अनन्या पांडे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। जहां माधवन एक कड़े प्रतिद्वंदी के रूप में सामने आते हैं, वहीं अनन्या पांडे का किरदार नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का काम करता है।
क्यों देखें ये फिल्म?
यह फिल्म इतिहास के एक अनदेखे नायक को सामने लाती है
इसमें है कानून, संघर्ष और सच्चाई की लड़ाई
दमदार एक्टिंग, प्रभावशाली डायलॉग्स और शानदार निर्देशन इसे बनाते हैं 2025 की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक
‘केसरी चैप्टर 2’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक दस्तावेज़ है — उस इंसान की कहानी जो सत्ता से नहीं डरा, बल्कि सच की राह पर डटा रहा।





