ब्रिटेन की जेलों में इस्लामी गैंग का कब्जा; शरिया कानून चला रहे, अधिकारी लाचार

लंदन। ब्रिटेन की हाई-सिक्योरिटी जेलों में इस्लामिक कट्टरपंथी गैंगों का बढ़ता वर्चस्व अब सुरक्षा एजेंसियों और जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुका है।
एचएमपी फ्रैंकलैंड जेल में हाल ही में हुए हमले ने इन जेलों में पनप रही कट्टरपंथ की जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। 12 अप्रैल को, 2017 मैनचेस्टर एरीना ब्लास्ट के दोषी हाशिम अबेदी ने साथियों के साथ मिलकर फ्रैंकलैंड जेल में गरम तेल और धारदार हथियारों से 3 जेल अधिकारियों पर हमला कर दिया। दो अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए। यह हमला दर्शाता है कि कैसे जेलों के भीतर इस्लामी गिरोहों ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है।
जेलों में ‘शरिया अदालतें’, डर के साए में कैदी
लंदन के एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रैंकलैंड जेल और अन्य हाई-सिक्योरिटी जेलें इस समय इस्लामी गिरोहों के नियंत्रण में हैं। इन गिरोहों ने धर्म के नाम पर अपनी खुद की ‘शरिया अदालतें’ बना ली हैं, जहां वे अन्य कैदियों को ‘धार्मिक सजा’ तक देते हैं। ब्रिटेन की जेलों में अब मुस्लिम गिरोह बाकायदा एक संगठित ढांचे में काम कर रहे हैं।
गिरोहों का बढ़ता दबदबा: आंकड़ों में हकीकत
- 2002 में मुस्लिम कैदियों की संख्या थी – 5,500
- 2024 तक यह बढ़कर हुई – 16,000
- आतंकी मामलों में बंद मुस्लिम कैदियों का प्रतिशत – 62%
इनमें से कई जेलों में ‘ब्रदरहुड’ के नाम पर समूह बनाए गए हैं, जो न सिर्फ धार्मिक कट्टरता फैलाते हैं, बल्कि ड्रग्स, ब्लैक मनी और हिंसा जैसे अपराधों को भी अंजाम देते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: जेलें बन सकती हैं आतंक का नया अड्डा
जेल और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ इयान एचसन ने कहा कि फ्रैंकलैंड जेल धीरे-धीरे एक बड़े आतंकी हमले की तरफ बढ़ रही थी। अबेदी का हमला इसका संकेत था। यह सामान्य सुरक्षा विफलता नहीं, एक प्रणालीगत खतरा है।” उन्होंने यह भी चेताया कि “जब तक इन गिरोहों और कट्टरपंथियों के खिलाफ जेलों में ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक ये जेलें आतंकी भर्ती और ब्रेनवॉशिंग के ठिकाने बनी रहेंगी।”





