ऐसा राजवंश जिसने छत्तीसगढ़ को बना दिया समृद्ध

रायपुर। सातवाहन साम्राज्य मध्य भारत के प्रमुख राजवंशों में से एक था… जिसका विस्तार महाराष्ट्र से लेकर आंध्र प्रदेश तक था… वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर, रायपुर, धमतरी और राजनांदगांव जैसे क्षेत्र भी सातवाहन साम्राज्य के अंतर्गत आते थे… इस राजवंश ने यहां करीब 400 सालों तक यहां राज किया… जिसका विवरण चीनी यात्री व्हेनसांग की यात्रा में मिलता है…दरअसल व्हेनसांग ने अपनी यात्रा के बारे में बताया हुआ था कि प्रसिध्द बौध्द दार्शनिक नागार्जुन, दक्षिण कोसल की राजधानी के पास रहता था.. और उस समय वहां सातवाहन वंशी राजा था…
बता दें कि ये वंश आंध्र जाति से संबंधित था.. जो दक्षिणापथ में साम्राज्य स्थापित करने वाला पहला दक्कनी राजवंश था… वे साम्राज्यवादी थे… और मध्यप्रदेश के जबलपुर तक उनका राज्य था.. वहीं कुछ साल पहले बिलासपुर जिले में कुछ सिक्के पाए गये थे.. जिसे लेकर कहा जाता है कि वो सातवाहन काल के थे.. इसके अलावा बिलासपुर जिले में पाषाण प्रतिमाएं भी मिली हैं.. जो भी सातवाहन काल की ही हैं… साथ ही सक्ती जिले के पास ॠषभतीर्थ में कुछ शिलालेख पाए गये हैं जिसमें सातवाहन काल के राजा कुमारवर दत्त का उल्लेख है..
वहीं छत्तीसगढ़ में सातवाहन काल के सबसे ज्यादा साक्ष्य जांजगीर-चांपा जिले में मिलते हैं.. यहां जांजगीर चांपा के बालपुर से सातवाहन काल की मुद्राएं भी मिली है… इसके अलावा जांजगीर चांपा के गूंजी नामक स्थान, जो उस समय ऋषभतीर्थ के नाम से जाना जाता था.. वहां से कुमार वरदत्तश्री के अभिलेख मिले हैं.. जिसमें ये बताया गया है कि कुमारवरदत्तश्री ने अपनी आयु बढ़ाने के लिए ब्राह्मणों को 1000 गाय दान में दिए थे..
इसके अलावा जांजगीर चांपा के किरारी गांव से काष्ठ स्तंभ प्राप्त हुआ है.. जिसमें सातवाहन कालीन अधिकारियों के पद और उसके नाम उल्लेखित हैं जो उस काल में प्रचलित रहे थे… वहीं बिलासपुर के चकरबेड़ा क्षेत्र से रोम कालीन स्वर्ण सिक्के प्राप्त हुए हैं.. साथ ही बिलासपुर में मल्हार के समीप बूढ़ीखार नामक जगह पर विष्णु जी की लेख से युक्त चतुर्भुज प्रतिमा प्राप्त हुई है… जिसमें तत्कालिक राजा वेदश्री की जानकारी मिलती है..
चलिए अब इस वंश के प्रमुख शासकों के बारे में जान लेते हैं…
- सिमुका सतकर्णी: ये सातवाहन वंश के संस्थापक है…जिसने सातवाहन साम्राज्य को एक शक्तिशाली साम्राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई…
- हाला: ये, इस वंश के महान शासकों में से एक, जिन्होंने संस्कृत भाषा में प्रसिद्ध ग्रंथ “गाथासप्तशती” की रचना की।
- गौतमीपुत्र सातकर्णी: ये एक योद्धा और कुशल राजनीतिज्ञ था.. जिसने शकों को पराजित किया और सातवाहन साम्राज्य का विस्तार किया..
- वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी: वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी सातवाहन वंश का अंतिम महान शासक था.. जिसका शासनकाल सांस्कृतिक समृद्धि का युग माना जाता था…
बता दें कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में सातवाहन राजवंश का बेहद खास योगदान है… इस राजवंश के शासनकाल में छत्तीसगढ़ को कला, वास्तुकला, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में एक नई पहचान मिली… जो आज भी जीवित है…इसके अलावा इस शासनकाल में छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक समृद्धि का भी अनुभव हुआ.. इस समय संस्कृत भाषा का प्रचार हुआ और कई विद्वानों ने ग्रंथों की रचना की… इसके अलावा, कला, संगीत और नृत्य के क्षेत्र में भी काफी विकास हुआ…
सातवाहन राजवंश के सिक्के छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं… ये सिक्के उस समय की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की गवाही हैं… वहीं छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक सातवाहन राजवंश के शासनकाल के अवशेषों को देख सकते हैं और छत्तीसगढ़ के समृद्ध इतिहास के बारे में जान सकते हैं.. सातवाहन राजवंश के शासनकाल के अवशेष जैसे कि भव्य स्तूप और मंदिर, आज भी छत्तीसगढ़ के गौरवमयी इतिहास की गवाही देते हैं… जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए गर्व और प्रेरणादायक है…





