बांग्लादेश के जल प्रबंधन मास्टरप्लान में चीन की बढ़ती भूमिका, भारत के लिए चिंता का विषय

बांग्लादेश ने अपने जल प्रबंधन और नदी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए चीन से 50 वर्षीय मास्टरप्लान तैयार करने का अनुरोध किया है। इस कदम ने क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है, खासकर भारत के लिए, जो इस क्षेत्र में जल सुरक्षा को लेकर पहले से ही सतर्क है।
चीन पहले से ही बांग्लादेश में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और जल परियोजनाओं में निवेश कर रहा है, जिससे उसकी इस क्षेत्र में पकड़ मजबूत होती जा रही है। अगर चीन बांग्लादेश के जल संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगता है, तो यह भारत की जल कूटनीति और रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकता है।
ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की पकड़
ब्रह्मपुत्र नदी, जो तिब्बत (चीन), भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है, लंबे समय से चीन की जल परियोजनाओं का केंद्र रही है। हाल के वर्षों में चीन ने इस नदी पर बड़े पैमाने पर जलविद्युत और जल संसाधन परियोजनाएं शुरू की हैं। इससे भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए चिंता बढ़ गई है।
भारत विशेष रूप से इस बात को लेकर चिंतित है कि चीन द्वारा बनाए जा रहे बांध और जलविद्युत परियोजनाएं भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम और अरुणाचल प्रदेश में जल प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। अगर चीन जल प्रवाह को नियंत्रित करता है, तो इसका असर बांग्लादेश तक पहुंचने वाले पानी पर भी पड़ेगा।
तीस्ता जल विवाद और नई चुनौतियां
भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर मतभेद रहे हैं। चीन की बढ़ती भागीदारी से यह मुद्दा और जटिल हो सकता है। अगर बांग्लादेश चीन पर अत्यधिक निर्भर हो जाता है, तो इससे भारत और बांग्लादेश के बीच जल समझौतों पर भी असर पड़ सकता है।
भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी जल कूटनीति को और मजबूत करना होगा, ताकि क्षेत्र में संतुलन बना रहे और रणनीतिक हित सुरक्षित रहें।





