Ayushman Bharat Scam : PM मोदी की योजना में हो रहा घोटाला, गरीबों के हक के पैसे डकार रहे अस्पताल

रायपुर : आज हम आपको एक ऐसे मामले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने पूरे बिलासपुर शहर को हिला कर रख दिया है। यह मामला सीधे-सीधे गरीबों के लिए बनाई गई आयुष्मान भारत योजना से जुड़ा है, जिसमें बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

क्या आप जानते हैं कि जिन अस्पतालों पर हमें भरोसा होता है, वही अस्पताल गरीबों के हक के पैसे डकार रहे हैं? जी हां, बिलासपुर के चार बड़े अस्पतालों पर फर्जी क्लेम करने का आरोप लगा है। आखिर कैसे हुआ ये घोटाला? और किस तरह से स्वास्थ्य विभाग ने इसका पर्दाफाश किया? जानने के लिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक बने रहिए।

आयुष्मान भारत योजना क्या है?

आयुष्मान भारत योजना, जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के नाम से भी जाना जाता है, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है. इसे 23 सितंबर, 2018 को पूरे भारत में लागू किया गया था. इस योजना की घोषणा 2018 के बजट सत्र में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी.

यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. इसके तहत, प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है. इस योजना का लक्ष्य लगभग 10 करोड़ बीपीएल धारक परिवारों (लगभग 50 करोड़ लोग) को लाभ पहुंचाना है. इसके अतिरिक्त, सरकार की योजना है कि बाकी बची आबादी को भी इस योजना के अंतर्गत लाया जाए.

लेकिन छत्तीसगढ़ में अब यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है। स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि इस योजना के तहत कई निजी अस्पताल फर्जीवाड़े में लिप्त हैं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने हेल्थ कमिश्नर डॉ. प्रियंका शुक्ला को जांच के आदेश दिए।

डॉ. प्रियंका शुक्ला ने तुरंत एक्शन लेते हुए 14 टीमें गठित कीं, जिन्होंने रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के अस्पतालों में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि बिलासपुर के नोबल, महादेव, शिशु भवन और एलाइट हॉस्पिटल ने आयुष्मान योजना के तहत फर्जी क्लेम किए हैं।

इन अस्पतालों ने गरीब महिलाओं के प्रसव के दौरान जन्म लेने वाले स्वस्थ बच्चों को कुपोषित दिखाया और सरकार से अधिक पैसे वसूले। यही नहीं, अस्पतालों ने कई मरीजों के नाम पर इलाज के झूठे बिल बनाकर करोड़ों रुपए का फर्जी क्लेम भी किया। यह साफ तौर पर एक बड़ा बीमा घोटाला है, जिसमें गरीबों के हक के पैसे हड़प लिए गए।

स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के बाद इन चारों अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है। अगर ये अस्पताल दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे अस्पतालों पर सरकार सख्त कदम उठाएगी? क्या दोषियों को सजा मिलेगी? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल – क्या गरीबों के लिए बनाई गई इस योजना का सही से लाभ मिलेगा या फिर ऐसे घोटालेबाज इसे बार-बार लूटते रहेंगे?

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