electricity-bill: छत्तीसगढ़वासियों के लिए कैसे सिरदर्द बना बढ़ा हुआ बिल ?

electricity-bill: प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं को अब महंगे बिजली बिल का झटका लगातार लग रहा है, और आगे भी छत्तीसगढ़वासियों को गर्मी के मौसम में महंगाई का डबल अटैक सहना होगा। बिजली अब महंगी हो गई है, और इसके कारण उपभोक्ताओं को अगले तीन महीने तक और महंगे बिल का सामना करना पड़ेगा।
दरअसल हर महीने ऊर्जा प्रभार पर FPPS यानी फ्यूल पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज 17.% तक लिया जाता है। अब दिसम्बर से इसे दो हिस्सों में लिया जा रहा है: एक हिस्सा तो नियमित है, लेकिन दूसरा हिस्सा एनटीपीसी लारा के अंतर का है, जिसकी वजह से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
क्यों महंगा हुआ बिजली का दाम
पॉवर कंपनी एनटीपीसी लारा से 2019 से आठ सौ मेगावाट बिजली रोज ले रही है। लारा में 800 मेगावाट के दो संयंत्र हैं, इसमें से एक की बिजली छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को मिलती है। पॉवर कंपनी जिन भी सरकारी या निजी कंपनियों से बिजली लेती है, उसका टैरिफ केंद्र और राज्य का बिजली नियामक आयोग तय करता है। एनटीपीसी का टैरिफ केंद्र के बिजली नियामक आयोग से तय होता है। इसका जो टैरिफ तय हुआ है और पॉवर कंपनी ने अब तक जो उससे बिजली ली है, उसमें करीब 30 पैसे यूनिट का अंतर होने के कारण 1502 करोड़ के अंतर की राशि हो गई है। इसको छह माह के अंतर में देने का आदेश हुआ है। जिसके बाद इस अंतर को अब छह किस्तों में उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है, जो अगले तीन महीनों तक जारी रहेगा। यह अंतर अक्टूबर से शुरू हो चुका है और दिसम्बर में जो बिल आया, उसमें यह शुल्क दो हिस्सों में लिया गया: एक हिस्सा नियमित था और दूसरा लारा से जुड़ा हुआ था। नवंबर के बिल में भी यही शुल्क लिया गया है, जिसमें नियमित वाला शुल्क 8.94 प्रतिशत और लारा वाला 7.99 प्रतिशत तय किया गया है। इस शुल्क की वसूली जनवरी में और फरवरी में भी जारी रहेगी।
इस बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ताओं को अगले कुछ महीनों तक महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। यह बदलाव खासकर उन परिवारों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं।





