राजधानी भोपाल में किसानों ने अपनी विभिन्न माँगों को लेकर मोहन सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन..

मध्य प्रदेश के किसानों ने सीएम मोहन यादव के खिलाफ विरोध जताया है। हजारों किसान बुधवार 5 फरवरी को राजधानी भोपाल में हल्ला बोलेंगे। बिजली-फसल के रेट सहित कई मुद्दों को लेकर किसान बड़ा प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन में शामिल होने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसान भोपाल पहुंच रहे हैं। बुधवार को लिंक रोड नंबर-1 पर किसान पहले धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद अन्नदाता अधिकार रैली निकालकर वल्लभ भवन का घेराव करेंगे। प्रदर्शन को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने किसानों को रोका तो वे वहीं धरना देंगे।

राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शन
भारतीय किसान संघ के मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान का कहना है कि भारतीय किसान संघ ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंका है। एमपी में किसान राजस्व विभाग के फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, नक्शा सुधार जैसे कार्यों में की जा रही लूट से परेशान हो गया है।

किसानों की माँग
किसानों ने कई मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। किसानों का कहना है कि डीएपी, यूरिया खाद सहकारिता के माध्यम से नगद वितरण समय पर किया जाए। सभी मंडियों में फ्लेट कांटों से तुलाई अनिवार्य हो। मंडी परिसर में ही भुगतान हो। पूसा बासमती धान को जीआई टैग दिया जाए। धान 3100 रुपए और गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा जाए।

साथ ही किसानों ने फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, ऑनलाइन रिकॉर्ड और नक्शा सुधारने की मांग की है। इसके अलावा हॉर्स पावर क्षमता वृद्धि वापस ली जाए। ट्रांसफॉर्मर और लाइनें समय सीमा में बदली जाएं। नकली दूध बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। प्रदेश में गो-अभयारण्य खोलने, प्रस्तावित और स्वीकृत नहरों के कार्य जल्द पूरा करने, सभी फसलों को एमएसपी से नीचे नहीं खरीदने और किसानों के झूठे प्रकरण वापिस करने की मांग की है।

कलेक्टर से शिकायत के बाद भी कुछ नहीं हुआ
किसानों का कहना है कि अपनी समस्याओं को लेकर तहसील और जिला स्तर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे, लेकिन समस्या पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इसलिए अपनी समस्याओं को सुनाने और निदान के लिए सरकार के दरवाजे पर आने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं। जिससे परेशान हैं। किसान बिजली कंपनियों द्वारा बिना जांच के भार वृद्धि करने के कारण आंदोलन के मूड में हैं और उसने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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