GBS सिंड्रोम से मरने वाला का बढ़ा ग्राफ, संख्या पहुंची 149, केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने राज्यों को जांच बढ़ाने का दिया निर्देश

दिल्ली। देश के कई राज्यों में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभागों की चिंता बढ़ गई है। महाराष्ट्र के पुणे में GBS के मामलों की संख्या बढ़कर 149 हो गई है, जिसमें 5 लोगों की मौत हो चुकी है।
तेलंगाना के सिद्दीपेट में 25 वर्षीय महिला में GBS के लक्षण पाए गए हैं, जिसे KIMS अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। असम के गुवाहाटी में 17 वर्षीय लड़की की GBS के कारण मृत्यु हुई है। पश्चिम बंगाल में 30 जनवरी तक 3 लोगों की मौत की खबर है, हालांकि इसकी सरकारी पुष्टि नहीं हुई है। राजस्थान के जयपुर में 28 जनवरी को एक बच्चे की GBS से मृत्यु हुई है।

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) क्या है
GBS एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से परिधीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। इसके लक्षणों में कमजोरी, सुन्नता, झुनझुनी, चलने में कठिनाई, और गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। यह स्थिति किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन वयस्कों और पुरुषों में अधिक आम है। अधिकांश लोग GBS से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में कमजोरी बनी रह सकती है।
GBS के लक्षण:
- कमजोरी और झुनझुनी जो पैरों से शुरू होकर बाहों और चेहरे तक फैलती है।
- चलने में कठिनाई और संतुलन की समस्या।
- पीठ और अंगों में दर्द।
- अनियमित हृदय गति और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव।
- सांस लेने में कठिनाई।





