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MPPSC कार्यालय के सामने धरना देने वाले अभ्यर्थियों पर दो थानों में केस दर्ज, कलेक्टर से मिलेंगे..

इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के खिलाफ धरना देने वाले अभ्यर्थियों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। सोमवार को संयोगितागंज और भंवरकुआं थानों ने प्रतिबंधात्मक धाराओं का उल्लंघन करने और बिना अनुमति धरना और रैली निकालने पर प्रकरण दर्ज कर लिया है, जिसमें कोचिंग क्लासेस संचालकों को दोषी बताया गया है। संचालकों पर अभ्यर्थियों को धरना देने के लिए भेजने का आरोप लगाया गया है।

कार्रवाई से अभ्यर्थी भड़के

उधर नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (एनईवाईयू) के पदाधिकारियों के अनुसार ऐसी कार्रवाई अभ्यर्थियों को भड़का सकती है। यदि प्रकरण वापस नहीं लिया गया तो दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा, हालांकि मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात की जाएगी, जिसमें यह मुद्दा भी उठाया जाएगा।

कलेक्टर ने अनशन तुड़वाया

पांच दिन धरना देने के बाद रविवार तड़के कलेक्टर आशीष सिंह ने अनशन तुड़वाया था। इसके बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री मोहन यादव से भोपाल में मिला। मांगों को लेकर आश्वासन मिलने के अगले दिन अभ्यर्थियों पर प्रकरण दर्ज हो गया। दोनों पुलिस थानों ने न्याय यात्रा निकालने और बिना अनुमति धरना देने पर कार्रवाई की है।

मामले में एनईवाईयू के पदाधिकारी राधे जाट और रणजीत किशनवंशी का कहना है कि धरने के बारे में संगठन ने अपने पत्र के माध्यम से सूचना दी थी। पहले कई बार स्पष्ट कर दिया था कि धरने में किसी भी कोचिंग संस्थान की कोई भूमिका नहीं है। पुलिस प्रशासन के इस रवैये से अभ्यर्थियों के साथ धोखा हुआ है। अगर उन्हें ऐसा करना था तो धरने के दौरान ही प्रकरण दर्ज करना था।

मुख्यमंत्री से मिलने के बाद कार्रवाई

कलेक्टर ने अनशन तुड़वाया और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद यह कार्रवाई उचित नहीं है। अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी हुई है। वे दोबारा धरना दे सकते हैं। मंगलवार को संगठन के कुछ पदाधिकारी कलेक्टर से मिलेंगे, जिसमें मांगों के समाधान पर चर्चा करनी है। इस दौरान प्रकरण को लेकर भी बातचीत की जाएगी।

कोचिंग संचालकों को भी बनाया आरोपित

धरने को लेकर राधे जाट, प्रशांत राजवत, रणजीत किशनवंशी, अरविंद भदौरिया, कुलदीप सरकार, गोपाल प्रजापति सहित अन्य अभ्यर्थियों पर प्रकरण दर्ज किया है। एडिशनल कमिश्नर अमित सिंह ने बताया कि दो थानों में एफआइआर दर्ज की गई है, जिसमें बेवजह भीड़ इकट्ठा करने पर कोचिंग संचालकों को भी आरोपित बनाया है। इनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।

जबरदस्ती खत्म करवाया धरना

एफआइआर के बारे में जानकारी लगते ही कुछ अभ्यर्थियों ने वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित किया है, जिसमें जबरदस्ती धरना खत्म करवाने की बात कही है। मामले में संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वीडियो में कही बातें बिल्कुल गलत हैं।

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