मालेगांव केस में बरी होने के बाद कर्नल पुरोहित के लिए गुड न्यूज, सेना ने प्रमोशन देकर बनाया ब्रिगेडियर

मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी रह चुके कर्नल श्रीकांत पुरोहित अब ब्रिगेडियर की रैंक पर प्रमोट कर दिए जाएंगे, इस प्रमोशन के लिए फिलहाल मंजूरी दे दी गई है. भारतीय सेना के मुताबिक, आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल ने इससे पहले प्रमोशन के लिए उनकी अपील पर सुनवाई की थी. कोर्ट ने रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी. इनका रिटायरमेंट 31 मार्च को होना था. दरअसल, कर्नल (टाइम स्केल) पुरोहित प्रसाद श्रीकांत को राहत देते हुए, आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) ने निर्देश दिया था कि उनकी रिटायरमेंट को तब तक रोककर रखा जाए, जब तक 2008 के मालेगांव धमाका मामले में बरी होने के बाद प्रमोशन और दूसरी सर्विस बेनिफिट्स पर विचार करने की उनकी कानूनी शिकायत पर कोई फैसला नहीं हो जाता.उन्होंने कर्नल और उसके बाद ब्रिगेडियर के पद पर प्रमोशन की मांग की थी. आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल एक्ट, 2007 की धारा 14 के तहत ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए, इन्होंने दलील दी थी कि 2008 में गिरफ्तारी के बाद आपराधिक मुकदमे का सामना करते समय उन्हें प्रमोशन का लाभ नहीं दिया गया.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नल (टाइम स्केल) रैंक में 15-18 साल की सर्विस के दौरान, लेफ्टिनेंट कर्नलों को प्रमोशन के लिए विचार किया जाता है. लगभग 30-50% लेफ्टिनेंट कर्नल, कर्नल बन जाते हैं. बाकी लेफ्टिनेंट कर्नल ही बने रहते हैं. जब ये लेफ्टिनेंट कर्नल 26 साल की सर्विस पूरी कर लेते हैं और उनका सर्विस रिकॉर्ड भी बेदाग होता है. उन्हें कर्नल (टाइम स्केल) का रैंक दिया जाता है. पुरोहित ने बहुत पहले ही 26 साल की सर्विस पूरी कर ली थी. चूंकि उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही थी और उन पर विजिलेंस बैन लगा था, इसलिए उन्हें कर्नल (टाइम स्केल) का रैंक बरी होने के बाद ही दिया गया.AFT ने कहा कि पहली नजर में हमें लगता है कि एक ऐसा मामला बनता है जिसमें आवेदक का यह तर्क सही हो सकता है कि उसे अपने जूनियर्स के बराबर प्रमोशन और दूसरे सभी सर्विस बेनिफिट्स के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, जो उसे नहीं दिए गए थे.





