बंगाल में SIR के बाद 91 लाख वोटर लिस्ट से हटे, कई जिलों में 50% से ज्यादा नाम डिलीट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) के तहत 91 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 11.9% है। नवंबर 2025 में शुरू हुई इस प्रक्रिया के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.6 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है।
कई जिलों में भारी डिलीशन
आंकड़ों के अनुसार दक्षिण दिनाजपुर में 58%, दार्जिलिंग में 55.3%, उत्तर 24 परगना में 55.1% और पश्चिम बर्धमान में 53.8% नाम हटाए गए। कूचबिहार, पश्चिम मिदनापुर, हावड़ा, अलीपुरद्वार और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटे हैं। कोलकाता में 36.3% और मुर्शिदाबाद में 41.8% डिलीशन दर्ज किया गया है।
राजनीतिक पैटर्न पर चर्चा
2021 विधानसभा चुनाव के वोट प्रतिशत और SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के आंकड़ों की तुलना करने पर दिलचस्प पैटर्न सामने आया है। जिन जिलों में टीएमसी को बढ़त मिली थी, वहां कई जगहों पर डिलीशन रेट ज्यादा रहा, जबकि बीजेपी के मजबूत क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटे हैं।
करीबी मुकाबले वाले जिलों में भी असर
कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में, जहां 2021 में बीजेपी को करीब 49% वोट मिले थे, वहां भी 44–50% तक नाम हटे हैं। वहीं पूर्व मिदनापुर जैसे करीबी मुकाबले वाले जिलों में भी 33% से ज्यादा डिलीशन दर्ज किया गया है।
चुनावी माहौल पर असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से आगामी चुनावों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।





