आतंकी कनेक्शन साबित न होने पर दो आरोपी बरी, 8 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

आतंकी संगठन से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार दो युवकों को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। करीब 8 साल जेल में रहने के बाद दोनों को राहत मिली, क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि वे प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े थे या किसी आतंकी गतिविधि में शामिल थे। ऐसे में उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
मामले में दोनों युवकों पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि वे आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे और हमले की साजिश रच रहे थे।
जांच एजेंसियों का दावा था कि गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे और वे हमले की योजना बना रहे थे। हालांकि अदालत में इन दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय सबूत मौजूद न हों। न्यायिक प्रक्रिया में संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना जरूरी है।
इस मामले में एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले का अहम निष्कर्ष सामने आया है।





