जेलों की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, नए निर्माण में नियमों के पालन के निर्देश

बिलासपुर। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों में बढ़ती भीड़ और सुविधाओं की कमी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नई जेलों के निर्माण में ‘मॉडल जेल मैनुअल 2016’ का सख्ती से पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी।

ओवरक्राउडिंग और सुविधाओं पर उठे सवाल

जेलों में ओवरक्राउडिंग, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर शिवराज सिंह ने याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है।

नई जेलों का निर्माण जारी

राज्य सरकार की ओर से पेश शपथपत्र में बताया गया कि:

  • बैमा नगई (बिलासपुर) में नई जेल का निर्माण तेजी से चल रहा है
  • निर्माण मॉडल जेल मैनुअल 2016 से भी उच्च मानकों पर किया जा रहा है
  • गुणवत्ता जांच के लिए 4 सदस्यीय समिति गठित की गई है

बेमेतरा में ओपन जेल तैयार

सरकार ने यह भी बताया कि बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली ओपन जेल बनकर तैयार हो चुकी है, जो केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप है।

हाईकोर्ट ने मांगी पूरी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि:

  • सभी जेलों की क्षमता और वर्तमान कैदियों की संख्या की जानकारी दी जाए
  • यह बताया जाए कि कैदियों को मॉडल मैनुअल के अनुसार सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं
  • जेल निर्माण में तय 11 बिंदुओं के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए

कोर्ट ने साफ किया है कि जेलों में पारदर्शिता और मानकों का पालन अनिवार्य है, और इस दिशा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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