कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी और खाड़ी देशों का कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो लगभग 30 महीने का उच्च स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जिसके कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कारोबारी सत्र के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई भी करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है।
मौजूदा वर्ष में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 33 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल में 60 प्रतिशत से ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है। केवल मार्च महीने में ही ब्रेंट क्रूड में लगभग 30 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में करीब 38 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।
घरेलू वायदा बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चा तेल 8500 रुपये प्रति बैरल के पार चला गया और कारोबार के दौरान यह 8518 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबा खिंचता है तो घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 10 हजार रुपये प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच देश में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भी हाल ही में इजाफा किया गया है, जिससे एलपीजी के दाम 900 रुपये के पार पहुंच गए हैं। इसके बाद यह आशंका भी बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बदलाव किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि सरकार इस असर को कम करने के लिए रूस से सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के विकल्प पर भी काम कर रही है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।





