पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले राज्यपाल के इस्तीफे पर सियासी विवाद, मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल के अचानक इस्तीफे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हैरानी जताते हुए इसके पीछे राजनीतिक दबाव की आशंका जताई है।
राज्यपाल के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने नए राज्यपाल की नियुक्ति भी कर दी है। जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नए राज्यपाल को पदभार सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस बदलाव ने चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस फैसले की जानकारी उन्हें केंद्रीय स्तर से दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्यपाल को बदलने का निर्णय लेने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई, जबकि इस तरह के मामलों में आम तौर पर राज्य सरकार से चर्चा की परंपरा मानी जाती रही है।
राज्यपाल ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इस पद पर काम किया है और अब पद छोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने इस्तीफे के कारणों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनके कार्यकाल की अवधि अभी बाकी थी, जिसके कारण इस फैसले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए संकेत दिया कि विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए दबाव बनाया गया हो सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र को सहकारी संघवाद की भावना का सम्मान करना चाहिए और ऐसे फैसलों से बचना चाहिए जो राज्यों की गरिमा को प्रभावित करते हैं।
राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच चुनावी मुकाबला पहले से ही तेज माना जा रहा है। ऐसे में राज्यपाल के इस्तीफे और नए राज्यपाल की नियुक्ति ने चुनावी माहौल में राजनीतिक बहस को और बढ़ा दिया है।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच लंबे समय से कई प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। विश्वविद्यालय नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और राज्य के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर टकराव की स्थिति बनी रही है।





