ईरान-इजराइल तनाव के बीच दुबई में फंसे बिलासपुर के तीन युवक, फ्लाइट कैंसिल होने से 8 दिन से नहीं हो पाई वापसी

पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी देखने को मिल रहा है। इसी वजह से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के तीन युवक पिछले आठ दिनों से दुबई में फंसे हुए हैं। ये तीनों दोस्त घूमने के लिए दुबई गए थे, लेकिन लगातार फ्लाइट रद्द होने के कारण उनकी भारत वापसी में देरी हो रही है।
जानकारी के मुताबिक, शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल पैकेज टूर के तहत दुबई घूमने गए थे। उन्हें पांचवें दिन भारत लौटना था, लेकिन उनकी वापसी की फ्लाइट 28 फरवरी को रद्द हो गई। इसके बाद तीन मार्च की नई टिकट बुक की गई, वह उड़ान भी कैंसिल हो गई। अब उन्हें 5 मार्च की फ्लाइट का टिकट मिला है और उसी से घर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
तीनों युवक दुबई में होटल में ठहरे हुए हैं और फिलहाल सुरक्षित हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए लगातार अपने परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं। युवकों ने बताया कि बार-बार फ्लाइट रद्द होने से होटल में रुकने की अवधि बढ़ गई है, जिससे उनका खर्च भी बढ़ रहा है। दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है और कई उड़ानें री-शेड्यूल हो रही हैं, जिससे यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
युवक शिवम मिश्रा ने एक वीडियो जारी कर परिवार को भरोसा दिलाया कि दुबई में हालात सामान्य हैं और पर्यटक स्थल खुले हुए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुर्ज खलीफा पर किसी तरह का कोई हमला नहीं हुआ है और शहर में रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं।
मामले में शिवम मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से फोन पर संपर्क किया, जिस पर उन्होंने युवकों की मदद का आश्वासन दिया है। वहीं युवकों के परिजनों ने भी भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से सुरक्षित वापसी के लिए मदद की अपील की है।
परिवार के अनुसार, शिवम के पिता ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं, जबकि उनके अन्य दोस्तों के परिवार भी अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हैं। परिजन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संपर्क में हैं और मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है कि फिलहाल प्रशासन के पास इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं पहुंची है। विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों में आमतौर पर विदेश मंत्रालय के स्तर पर ही समन्वय कर कार्रवाई की जाती है।





