दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: घर के पास सार्वजनिक यूरिनल और खुला कूड़ादान गरिमा के अधिकार का उल्लंघन

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी व्यक्ति के घर के ठीक पास सार्वजनिक यूरिनल और खुला कूड़ादान होना संविधान के तहत स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमित बंसल ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को चार सप्ताह के भीतर इन संरचनाओं को हटाने का आदेश दिया।
क्या था मामला?
एक वकील ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी संपत्ति की पूर्वी दीवार के पास बिना अनुमति के खुला कूड़ेदान और सार्वजनिक पेशाबघर बना दिया गया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार:
- आसपास के लगभग 150 लोग उसी कूड़ेदान में कचरा डालते हैं।
- कई बार शिकायत के बावजूद सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं रही।
- बदबू और गंदगी के कारण क्षेत्र में रहना मुश्किल हो गया है।
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि साफ-सुथरा वातावरण स्वस्थ जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। यदि किसी को अस्वच्छ माहौल में रहने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उसके सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकार का हनन है।
कोर्ट ने माना कि केवल नियमित सफाई का दावा पर्याप्त नहीं है, क्योंकि खुला कूड़ादान और सार्वजनिक यूरिनल अपने आप में गंभीर असुविधा और परेशानी का कारण हैं।
अंतिम आदेश
संयुक्त निरीक्षण (7 अगस्त 2025) के बाद कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के घर के पास बने खुले डस्टबिन और यूरिनल को तुरंत हटाया जाए।
कोर्ट ने इसे “बिना किसी शक के एक परेशानी” करार देते हुए MCD को चार हफ्तों में कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया।
यह फैसला स्वच्छता और गरिमामय जीवन के संवैधानिक अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।





